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चुनाव आयोग ने किया स्पष्ट : SIR में स्वीकृत नहीं होंगी 2010 के बाद जारी OBC सर्टिफिकेट

साल 2010 तक राज्य के OBC जनजाति ही सिर्फ अपने सर्टिफिकेट को SIR की सुनवाई में दाखिल कर सकेंगे।

By Shubhrajit Chakraborty, Posted By : Moumita Bhattacharya

Jan 01, 2026 13:45 IST

जिन OBC सर्टिफिकेट को कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के आदेश से रद्द कर दिया गया था उन्हें SIR के काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। चुनाव आयोग ने इस बात की स्पष्ट घोषणा करते हुए कहा कि साल 2010 तक राज्य के OBC जनजाति ही सिर्फ अपने सर्टिफिकेट को SIR की सुनवाई में दाखिल कर सकेंगे।

कौन इस्तेमाल कर नहीं सकेंगे सर्टिफिकेट?

बताया जाता है कि बाद में राज्य सरकार ने जिन 113 जनजातियों को इस सूची में शामिल किया था उनके सर्टिफिकेट को स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इस बाबत चुनाव आयोग के फैसले के संबंध में जानकारी दी। साल 2010 के बाद से लेकर 2014 के मई तक जारी सभी OBC सर्टिफिकेट को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि उन सभी सर्टिफिकेट को SIR में सुनवाई के काम में इस्तेमाल नहीं करने का फैसला लिया गया है। इस बारे में जिलाधिकारियों समेत जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को जानकारी दे दी गयी है।

पिछले साल ही रद्द की गयी थी सर्टिफिकेट

साल 2010 के बाद से जिन्हें OBC जनजाति का सर्टिफिकेट प्रदान किया गया था, उन्हें पिछले साल ही हाई कोर्ट के आदेश पर रद्द कर दिया गया था। साल 2010 से पहले जो जनजातियां OBC श्रेणी में शामिल थी कोर्ट ने सिर्फ उन्हें ही OBC जनजाति की मान्यता दी थी।

वहीं दूसरी ओर राज्य में चल रही SIR की प्रक्रिया में जिन 11 दस्तावेजों को स्वीकृति दी गयी है उनमें OBC सर्टिफिकेट भी शामिल है। इसे लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला भी दायर किया गया था। इसमें मार्च 2010 से लेकर 2024 तक जितने OBC सर्टिफिकेट जारी किए गए थे, उन सभी को रद्द करने की मांग की गयी थी।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट की खंडपीठ के फैसले में कहा गया था कि राज्य में 2010 से 2024 तक के सभी OBC सर्टिफिकेट रद्द कर दिए जाएं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगा दी है। वहां एक मामला चल रहा है। इस वजह से मामला करने वाले ने आयोग से अपील की थी कि इस दस्तावेज को 'SIR' में स्वीकार न किया जाए। जब इससे भी कोई फायदा नहीं हुआ तो हाई कोर्ट में केस दर्ज की गयी। हाई कोर्ट ने आयोग को उस केस पर फैसला लेने का निर्देश दिया।

हाई कोर्ट ने पिछले सप्ताह ही कहा था कि चुनाव आयोग तय करेगा कि तृणमूल के जमाने में जिन लोगों को OBC सर्टिफिकेट दिया गया है, वे 'SIR' में मान्य होंगे अथवा नहीं। सरकार ने जिन जनजातियों को OBC श्रेणी में शामिल किया था, उन्हें हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है लेकिन मुख्य मामला अभी भी चल रहा है।

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