SIR को लेकर राज्य में राजनीति जोरों पर है। मतदाता सूची के मसौदा से 58 लाख से ज्यादा लोगों के नाम पहले ही हटा दिए गए हैं। जानकारों का मानना है कि अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या और बढ़ सकती है। शुक्रवार को मालदह में भाजपा की परिवर्तन संकल्प यात्रा की सभा के दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इसी तरफ इशारा किया।
उन्होंने कहा कि 14 फरवरी के बाद वे खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगे। कह देंगे - हम अब और चुनाव नहीं लड़ेंगे।' गौरतलब है कि चुनाव आयोग इसी दिन (14 फरवरी) को अंतिम मतदाता सूची जारी करने वाला है। तृणमूल कांग्रेस ने भी शुभेंदु अधिकारी पर कटाक्ष करते हुए इसे 'बचकानी हरकत' करार दिया है।
शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा, 'तृणमूल कभी भी उत्तर मालदह में सेंध नहीं लगा पाई। क्योंकि यहां के सनातनी एकजुट हैं। अगर 100 अल्पसंख्यकों में से 99 वोट तृणमूल को मिलते हैं तो सनातनी और आदिवासियों के 100 में से 99 वोट भाजपा को क्यों नहीं मिलेंगे? अगर ऐसा हुआ तो भाजपा 220 सीटें जीतेगी।'
इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने SIR मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला। मतदाता सूची के मसौदा से 58 लाख नाम हटने की बात कहते हुए उन्होंने कहा, "यह तो बस शुरुआत है। 14 फरवरी के बाद वे खुद कहेंगे कि हम दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे।" अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद अलग-अलग हिंदू संगठनों द्वारा दिए गए नारे भी शुभेंदु अधिकारी ने दोहराए "यह तो बस एक झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है।"
किसी जमाने में जब अंग-बंग-कलिंग का नाम एक साथ लिया जाता था। अंग का मतलब आज का बिहार है। विपक्षी नेता ने कहा, '50 किलोमीटर दूर बिहार में भाजपा की सरकार बन गई है। बाकी सब साफ हो गए हैं।' कलिंग का मतलब ओडिशा है। वहां भी अब भाजपा की सरकार है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'ओडिशा के लोगों ने जय जगन्नाथ कहकर भाजपा को वोट दिया। वहां एक आदिवासी नेता मुख्यमंत्री बन गया।' उनका दावा है कि इस बार बंगाल की बारी है। उन्होंने कहा कि अंग और कलिंग जीत लिया गया है। अब बंग यानी बंगाल जीतना होगा। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा करना है।
भाजपा कई बार बंगाल में दुर्गा पूजा और काली पूजा में रुकावट डालने का आरोप लगा चुकी है। शुक्रवार को शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर से वहीं आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "सनातनियों को अब अपना धर्म मानने के लिए हाई कोर्ट से इजाजत लेनी पड़ती है। हम किस राज्य में रह रहे हैं?"
बांग्लादेश में दीपू दास की हत्या की तुलना मुर्शिदाबाद में हरगोविंद दास और चंदन दास की हत्याओं से करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मीट काटने वाले चाकू से काट डाला गया। मोथाबारी में घर जला दिए गए। धुलियान और शमशेरगंज में हिंसा फैलाई गई। भाजपा सत्ता में आई तो हर चीज का हिसाब लिया जाएगा।"
हालांकि तृणमूल के प्रवक्ता जयप्रकाश मजूमदार ने शुभेंदु अधिकारी की बातों को बचकानी हरकत करार देते हुए कहा, "जब विधानसभा में विपक्ष का नेता मंच पर यह सब कहता है तो समझिए कि उसने राजनीति को मजाक बना दिया है। क्या तृणमूल जैसी पार्टी के लिए यह उम्मीद करना बेवकूफी नहीं है कि मतदाता सूची जारी होने के बाद वह चुनाव नहीं लड़ेगी? लोग इन सब बातों पर हंसते हैं।"