केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने शुक्रवार को डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में इंडियन फार्माकोपिया 2026 (आईपी 2026) के 10वें संस्करण का लोकार्पण किया। यह दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और नियामक मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इंडियन फार्माकोपिया 2026 में 121 नए मोनोग्राफ जोड़े गए हैं, जिससे कुल मोनोग्राफ की संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है। इसमें टीबी-रोधी, मधुमेह-रोधी, कैंसर-रोधी दवाओं और आयरन सप्लीमेंट्स जैसे प्रमुख उपचार क्षेत्रों को और अधिक मजबूत किया गया है, जिससे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उपयोग होने वाली दवाओं का मानकीकरण सुनिश्चित होगा।
नड्डा ने कहा कि इंडियन फार्माकोपिया देश में दवाओं के लिए आधिकारिक मानक पुस्तक है और भारत की फार्मास्यूटिकल नियामक व्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि इसका 10वां संस्करण वैज्ञानिक प्रगति, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और दवा निर्माण व नियमन में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, फार्माकोविजिलेंस का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में इंडियन फार्माकोपिया के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार्यता मिली है और यह भारत सरकार की हेल्थ डिप्लोमेसी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। उन्होंने बताया कि इंडियन फार्माकोपिया के मानकों को अब ग्लोबल साउथ के 19 देशों में मान्यता मिली है, जो वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। नड्डा ने यह भी रेखांकित किया कि फार्माकोविजिलेंस के क्षेत्र में भारत ने बड़ी प्रगति की है। WHO के फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में योगदान के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग 2009–2014 में 123वें स्थान से बढ़कर 2025 में 8वें स्थान पर पहुंच गई है।
आईपी 2026 की एक बड़ी नियामक उपलब्धि के रूप में पहली बार ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन से जुड़े 20 ब्लड कंपोनेंट मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स (सेकंड अमेंडमेंट) रूल्स, 2020 के अनुरूप हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि इंडियन फार्माकोपिया 2026 का प्रकाशन भारत की फार्मास्यूटिकल नियामक प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत, विज्ञान-आधारित फार्माकोपिया बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि फार्माकोपिया मानकों का निरंतर अद्यतन और सामंजस्य वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, मरीजों की सुरक्षा और नियामक उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही वैश्विक फार्मास्यूटिकल आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को भी समर्थन देता है। इंडियन फार्माकोपिया का प्रकाशन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी) द्वारा किया जाता है।