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इज़राइली राजदूत ने प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा की पुष्टि की

यात्रा की तारीखों की घोषणा सही समय पर की जाएगी

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 28, 2026 17:06 IST

नई दिल्ली: भारत में इज़राइल के राजदूत रयूवेन अज़ार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इज़राइल आने का निमंत्रण दिया जा चुका है। इस यात्रा को लेकर तैयारियाँ चल रही हैं और यात्रा की तारीखों की घोषणा सही समय पर की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मरण दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एएनआई से बातचीत में राजदूत अज़ार ने यह जानकारी दी।

भारत और इज़राइल के संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक हैं। वर्ष 2025 दोनों देशों के लिए बहुत उपयोगी रहा। इस दौरान कई मंत्रिस्तरीय बैठकें और यात्राएँ हुईं। इस अवधि में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें द्विपक्षीय निवेश संधि, सुरक्षा से जुड़े समझौते, मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति और वित्तीय प्रोटोकॉल शामिल हैं। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का एक अहम हिस्सा है।

उन्होंने कहा,“2025 हमारे लिए एक बेहतरीन साल रहा। कई मंत्रियों की बैठकें और यात्राएँ हुईं। हमने द्विपक्षीय निवेश संधि सहित कई समझौते किए हैं। हम मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना चाहते हैं और वित्तीय प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करना चाहते हैं। हमने एक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और जल्द ही एक और करने की उम्मीद है। यह साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक है और हम 2026 में भी इसे और मजबूत करना चाहते हैं।”

होलोकॉस्ट स्मरण दिवस के महत्व पर बोलते हुए राजदूत अज़ार ने कहा कि यह दिवस घृणा, असहिष्णुता और नस्लीय श्रेष्ठता की सोच के खतरों की याद दिलाता है। होलोकॉस्ट यहूदियों की योजनाबद्ध हत्या थी, जो एक खतरनाक विचारधारा से प्रेरित थी। असहिष्णुता मानवता के लिए बहुत गंभीर परिणाम ला सकती है और इसे रोकना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

राजदूत ने भारत की सभ्यतागत परंपराओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत में सहिष्णुता और विविधता की लंबी परंपरा रही है। यहूदी समुदाय ने भारत में हमेशा सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जिया है और उन्हें यहाँ कभी उस तरह का उत्पीड़न नहीं झेलना पड़ा, जैसा अन्य देशों में हुआ। भारत की सभ्यता सहिष्णुता पर आधारित रही है। यहूदियों ने यहाँ सुखद अनुभव किया है और हम इसके लिए आभारी हैं। यह हमारी दोनों सभ्यताओं के बीच गहरी मित्रता को दर्शाता है।

यह कार्यक्रम 27 जनवरी को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मरण दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था। यह दिवस द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी शासन द्वारा मारे गए 60 लाख यहूदियों की स्मृति में मनाया जाता है। इससे पहले, इसी कार्यक्रम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए आतंकी हमले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत इस तरह की अंधी और निरर्थक हिंसा से भली-भांति परिचित है क्योंकि वह स्वयं सीमा-पार आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की ओर परोक्ष रूप से संकेत किया, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। विदेश सचिव ने बताया कि भारत ने 7 अक्टूबर के आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ इज़राइल के साथ एकजुटता व्यक्त की थी।

होलोकॉस्ट के महत्व पर बोलते हुए मिस्री ने कहा कि इतिहास से मिलने वाले सबक आज भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि होलोकॉस्ट की शुरुआत लोगों की हत्या से नहीं हुई थी, बल्कि घृणा, अमानवीय भाषा और बहिष्कार जैसे शब्दों से हुई थी। यदि समाज में पूर्वाग्रह, भेदभाव और चुप्पी को सामान्य मान लिया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

मिस्री ने कहा कि होलोकॉस्ट के पीड़ितों को याद करना नैतिक जिम्मेदारी है और यह संकल्प लेने का अवसर भी है कि मानवता के खिलाफ ऐसे अपराध दोबारा न हों। आतंकवाद को उसके हर रूप में नकारा जाना चाहिए और भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के प्रयासों का लगातार समर्थन करता है। उन्होंने गाज़ा शांति योजना के तहत हुई प्रगति का स्वागत किया और कहा कि संघर्षविराम और बंधकों की रिहाई से लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये प्रयास क्षेत्र में स्थायी शांति और संघर्षों के स्थायी समाधान की ओर ले जाएँगे।

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