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दिल्ली बैठक में पंजाब नेताओं को दो टूक संदेश-मीडिया में बयानबाजी बंद करें, गुटबाजी नहीं चलेगी

पंजाब में कांग्रेस की सख्त लाइन: अंदरूनी कलह पर लगाम, 2027 की तैयारी में हाईकमान का हस्तक्षेप।

By श्वेता सिंह

Jan 23, 2026 00:00 IST

नयी दिल्लीः पंजाब में लगातार सामने आ रही गुटबाजी और सार्वजनिक बयानबाजी से चिंतित कांग्रेस हाईकमान ने अब साफ और सख्त रुख अपना लिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसी भी तरह की अंदरूनी खींचतान को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इसी रणनीति के तहत गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की एक अहम बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद रहे।

करीब तीन घंटे चली इस बैठक में पार्टी नेतृत्व ने पंजाब के नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे आपसी मतभेदों को सार्वजनिक मंच या मीडिया में उठाने से बचें और संगठनात्मक अनुशासन का पालन करें। पार्टी ने यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है और सभी नेताओं को सामूहिक रूप से 2027 के चुनाव की तैयारी में जुटना होगा।

बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की और राज्य नेताओं के विचार सुने। उन्होंने बताया कि पार्टी का निर्देश बिल्कुल स्पष्ट है-हर नेता के पास अपनी राय हो सकती है, लेकिन उसे पार्टी मंच पर ही रखा जाए। मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए आंतरिक मुद्दों को हवा देना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा।

वेणुगोपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि टिकट वितरण, चुनावी रणनीति और प्रचार से जुड़े फैसले पार्टी हाईकमान तय करेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि समूह बनाकर दबाव की राजनीति करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यदि कोई नेता राहुल गांधी या पार्टी नेतृत्व से मिलना चाहता है तो वह व्यक्तिगत रूप से अनुरोध कर सकता है, लेकिन सामूहिक हस्ताक्षर अभियान या गुटीय गतिविधियां बर्दाश्त नहीं होंगी।

बैठक में सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठा। कुछ नेताओं द्वारा कमजोर वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने की बात कहे जाने पर पार्टी ने दोहराया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और सामान्य वर्ग के गरीबों को प्रतिनिधित्व देना कांग्रेस की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है और पंजाब में भी इसी सिद्धांत का पालन किया जाएगा।

इस बैठक में यह संकेत भी दिया गया कि कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही पंजाब का दौरा करेगा और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का आकलन है कि आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ पंजाब में सत्ता विरोधी माहौल बन रहा है और यदि कांग्रेस एकजुट होकर मैदान में उतरती है तो 2027 में वापसी की मजबूत संभावना है।

पंजाब मामलों के प्रभारी और वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और अनुशासनहीनता पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सीएलपी नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, अंबिका सोनी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, यह बैठक कांग्रेस के उस प्रयास का संकेत है जिसमें वह समय रहते संगठनात्मक कमजोरी को दूर कर, गुटबाजी पर अंकुश लगाकर और स्पष्ट नेतृत्व संदेश देकर पंजाब में राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है।

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