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‘दादा’ के जाने के बाद बारामती की राजनीति में सुनेत्रा पवार का उदय

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन से बारामती के लोग और राजनीतिक गलियारे स्तब्ध।

By श्वेता सिंह

Jan 29, 2026 21:19 IST

मुंबईः बारामती-एक शहर, जो दशकों तक अजित पवार के नेतृत्व में राजनीतिक और सामाजिक विकास का प्रतीक रहा, अब अचानक हुए दुःखद हादसे से स्तब्ध है। बुधवार शाम एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार का निधन ने बारामती के निवासियों को गहरे सदमे में डाल दिया।

स्थानीय लोग आज भी अजित पवार की याद में खोए हैं। शिक्षक गणेश लोंढे कहते हैं, “हमारे लिए दादा सिर्फ नेता नहीं थे, वह बारामती के हर विकास और हर योजना के पीछे की शक्ति थे। उनके जाने से शहर में खालीपन महसूस हो रहा है। हर कोई सोच रहा है कि अब हमारा भविष्य कैसा होगा।”

राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल है कि अजित पवार की खाली हुई सीट को कौन भरेगा। NCP की टॉप लीडरशिप सुनेत्रा पवार को इस पद के लिए सबसे काबिल उम्मीदवार मान रही है। सुनेत्रा वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और ऐसी चर्चाएं हैं कि उन्हें डिप्टी सीएम का पद ऑफर किया जा सकता है। पार्टी का मानना है कि सुनेत्रा पवार के आने से महायुति अलायंस की स्थिरता और बारामती की राजनीतिक ऊर्जा बनी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे ने इस मुद्दे पर सुनेत्रा पवार के साथ बैठक की है। NCP के वरिष्ठ नेता नरहरि जिरवाल ने कहा, “जनता चाहती है कि ‘बहिनी’ कैबिनेट में शामिल हो। उनकी उपस्थिति अजित पवार की याद और विरासत को जीवित रखेगी।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार का महायुति अलायंस में कदम रखना अब केवल समय की बात है। प्रफुल्ल पटेल जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे और पार्टी तथा अलायंस के भविष्य की दिशा तय करेंगे। अफवाहें यह भी हैं कि अजित पवार की मौत के बाद NCP के दोनों खेमे फिर से एकजुट हो सकते हैं।

बारामती के लोग और पार्टी कार्यकर्ता अब इस खालीपन और अनिश्चितता में आशा और चिंता दोनों में हैं। अजित पवार की अचानक मृत्यु ने एक तरफ शहर और पार्टी में शोक और संवेदना का माहौल बना दिया है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में नए समीकरण और बदलावों के संकेत भी साफ दिखाई दे रहे हैं।

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है और सुनेत्रा पवार की भूमिका इस बदलाव में निर्णायक साबित होने वाली है। बारामती की जनता के लिए यह समय सिर्फ शोक का नहीं, बल्कि नए राजनीतिक अध्याय की तैयारी का भी है।

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