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'बंकिम दा' के बाद रिपब्लिक डे परेड में अब मातंगिनी हाजरा का नाम बोलने में गलती!

बंगाली वीरांगना का नामउद्घोषिका ने गलत ढंग से उच्चारित किया, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो।

By अरिंदम बंद्योपाध्याय, Posted by: श्वेता सिंह

Jan 26, 2026 15:16 IST

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस परेड के दौरान इस बार फिर बंगाली स्वतंत्रता सेनानियों के नाम को लेकर राजधानी में विवाद खड़ा हो गया। पश्चिम बंगाल की झांकी पेश करते समय उद्घोषिका मातंगिनी हाजरा का नाम उच्चारण करने में गलती की। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हंगामा मच गया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि भारत छोड़ो आंदोलन की शहीद मातंगिनी हाजरा का नाम उद्घोषिका ने 'मंतगिनी हाजरा' बोला। यह वही अपभ्रंश है जिसने पहले भी बंगाली कवि और विद्वानों के नामों के उच्चारण को लेकर विवाद पैदा किया था।

अब मातंगिनी हाजरा के नाम पर हंगामा

यह पहली बार नहीं है जब मातंगिनी हाजरा के नाम को लेकर राजधानी में हंगामा हुआ हो। इससे पहले, उत्तर प्रदेश के BJP सांसद दिनेश शर्मा ने मातंगिनी हाजरा को मुस्लिम का टाइटल देने का विवादित बयान दिया था, जिस पर बंगाल में भारी प्रतिक्रिया हुई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बंगाली नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

पिछले साल भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चटर्जी को 'बंकिमदा' कहकर संबोधित करना विवाद में आया था। बाद में MP के एतराज के बाद प्रधानमंत्री ने गलती सुधार ली थी।

झांकी में बंगाल का योगदान

इस बार रिपब्लिक डे परेड की झांकी की थीम थी: 'स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम'। पश्चिम बंगाल सरकार की झांकी में स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल की भूमिका को प्रदर्शित किया गया। झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी को आनंदमठ लिखते दिखाया गया, उनके पीछे पांच स्वतंत्रता सेनानी थे।

झांकी में प्रमुख मॉडल शामिल थे:

सुभाष चंद्र बोस – घोड़े पर सवार आजाद हिंद वाहिनी के कमांडर-इन-चीफ

मातंगिनी हाजरा – राष्ट्रीय ध्वज लिए

रवींद्रनाथ टैगोर – फांसी पर चढ़ते हुए

खुदीराम बोस – अन्य स्वतंत्रता सेनानी

झांकी में अंग्रेजों के अत्याचार और बंगाल के योगदान को भी दर्शाया गया।

सोशल मीडिया की हलचल

उद्घोषिका के उच्चारण की गड़बड़ी पर सोशल मीडिया पर तुरंत प्रतिक्रिया आई। वीडियो वायरल होने के बाद ट्विटर और फेसबुक पर हजारों लोग इस पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नामों का सही उच्चारण इतिहास और सम्मान का हिस्सा है और इसे लेकर सतर्क रहना जरूरी है।

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