नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अजित पवार के बावजूद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों-एक अजित पवार और दूसरा शरद पवार के नेतृत्व वाला के पुनः विलय की संभावना बहुत कम है। गोयल ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “मैं व्यक्तिगत तौर पर नहीं देखता कि ऐसा होगा।” उनका यह बयान उस समय आया है जब अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राजनीतिक गलियारों में पार्टी के पुनर्एकीकरण को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
पीयूष गोयल ने कहा कि महाराष्ट्र में महायुति सरकार का हिस्सा रहते हुए NCP ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके मुताबिक, पार्टी का नेतृत्व पहले अजित पवार के साथ था और अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में संगठन मजबूती से खड़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व में बदलाव के बावजूद संगठनात्मक दिशा और नीति में कोई भ्रम नहीं है। गोयल ने यह भी बताया कि प्रफुल्ल पटेल को NCP का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कहना था कि इस कदम से पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन में स्थिरता बनाए रखना और भविष्य की रणनीति तय करना उनकी प्राथमिकता है।
शरद पवार को लेकर पीयूष गोयल का बयान राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि शरद पवार को NCP में आमंत्रित किया जाएगा। गोयल के अनुसार, शरद पवार ने जनता का भरोसा और वोट दोनों खो दिए हैं। यह संकेत देता है कि NCP के मौजूदा नेतृत्व और शरद पवार के बीच राजनीतिक दूरी अभी भी बरकरार है। जब उनसे पूछा गया कि अगर अजित पवार गुट पुनः एकीकरण चाहता है और शरद पवार पार्टी में आते हैं, तो क्या BJP के लिए कोई परेशानी होगी, गोयल ने कहा कि वह ऐसी किसी संभावना को ही नहीं देखते। उनका यह बयान BJP के आत्मविश्वास और महायुति सरकार में स्थिरता को रेखांकित करता है।
गोयल ने सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी और उनके राजनीतिक भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि वह एक जुनूनी और समर्पित नेता हैं और उन्होंने सुनेत्रा पवार के काम को राज्यसभा और बारामती में नजदीक से देखा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अजित पवार की कमी हमेशा महसूस की जाएगी। उन्होंने उन्हें एक बेहतरीन प्रशासक, जननेता और महाराष्ट्र के लोगों का चहेता बताया। गोयल के अनुसार, उनके जाने से राज्य की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है।
सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के साथ आबकारी, खेल, अल्पसंख्यक विकास और औकाफ विभाग सौंपे गए हैं। हालांकि, वित्त और योजना विभाग उनके दिवंगत पति अजित पवार के पास था। यह संकेत देता है कि सरकार ने संतुलन बनाए रखते हुए जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया है। पीयूष गोयल के बयान से स्पष्ट है कि अजित पवार के निधन के बावजूद NCP के दोनों गुटों का पुनर्एकीकरण अब संभव नहीं। पार्टी अब नए नेतृत्व और नई दिशा के साथ आगे बढ़ेगी, जबकि महाराष्ट्र की राजनीति में यह बदलाव लंबे समय तक असर डाल सकता है।