नई दिल्ली: हाड़–कपाने वाली ठंड में पिछले एक महीने से चली आ रही है तैयारी — ‘कदमताल! लेफ्ट, राइट, लेफ्ट... सावधान–विराम!’ 140 सदस्यों के प्रत्येक हाथ–पांव की मूवमेंट एक साथ हो रही है या नहीं। ठीक से कमांड फॉलो कर पा रहे हैं या नहीं, इस पर भी लगातार नजर रखी गई है। अंततः वह महापरिणाम का क्षण आ गया और दो दिन बाद देश के 77वें गणतंत्र दिवस पर असली प्रदर्शन देखा जाएगा। नेतृत्व करेंगे जम्मू और कश्मीर की सिमरन बाला। 26 वर्षीय स्मार्ट और कुशल इस अधिकारी सीआरपीएफ की असिस्टेंट कमांडेंट हैं। देश के गणतंत्र के 76 वर्ष पूरे होने के दिन वह दिल्ली के राजपथ पर ऑल–मेल सीआरपीएफ यूनिट का नेतृत्व पहली महिला अधिकारी के रूप में करेंगी। इससे पहले महिला सेना या मिश्रित सेना का नेतृत्व महिलाओं ने किया था लेकिन सिर्फ पुरुष दल को कूचकावाज में नेतृत्व देने वाली किसी महिला अधिकारी का यह कार्य असामान्य उपलब्धि है। आमतौर पर किसी वरिष्ठ पुरुष अधिकारी इस परेड के नेतृत्व में रहते हैं। आत्मविश्वासी इस अधिकारी ने कहा कि आशा है कि हम सभी ने जो मेहनत की है उसका परिणाम हम उस दिन दिखा पाएंगे।
पहली कोशिश में ही यूपीएससी के सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 82वीं रैंक प्राप्त की। अपने जिले से कमीशन अधिकारी के रूप में सिमरन सीआरपीएफ में शामिल हुईं। बाद में गुरुग्राम की सीआरपीएफ अकादमी में प्रशिक्षण पूरा किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें बैच की श्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता में गिना और उनकी अनुशासन, नेतृत्व गुण और संचार कौशल की प्रशंसा की। उनकी पहली ऑपरेशनल पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के एक ‘बस्तरिया’ बटालियन में हुई, जो माओवादी आतंकवाद का एक प्रमुख केंद्र था। वहां भी उनकी दक्षता उल्लेखनीय रही।
जम्मू और कश्मीर के नौशेरा सेक्टर की सिमरन ने कहा कि भारतीय गणतंत्र के इस स्तर के आयोजन में सीआरपीएफ कंटिंजेंट का नेतृत्व करने का अवसर पाकर मैं वास्तव में सम्मानित महसूस कर रही हूं। बचपन से ही यूनिफॉर्म में पुरुष और महिलाओं को देखकर बड़ा हुआ हूं। उस माहौल ने मुझे प्रेरित किया। सीआरपीएफ में लिंग संतुलन के बारे में सिमरन ने बताया कि जिम्मेदारी और अवसर पूरी तरह से योग्यता के आधार पर दिए जाते हैं, महिला–पुरुष देखकर नहीं। उन्होंने महिला बटालियन गठन और ऑपरेशनल भूमिकाओं में महिलाओं के शामिल होने की बात भी कही। इस संदर्भ में अपनी राज्य की लड़कियों से कहा, अपने ऊपर विश्वास रखो, बड़े सपने देखो और कड़ी मेहनत करो। अब अवसर योग्यता के आधार पर मिलता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता की कथा कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने प्रस्तुत की। इसके बाद सिमरन को यह जिम्मेदारी दी गई कि देश की महिला शक्ति को विश्व मंच पर प्रस्तुत किया जाए, इस पर कहीं भी कोई मतभेद नहीं है। सिमरन के गर्वित माता–पिता–दीदी अपनी ‘डानपिटे’ बेटी की इस सम्मान में स्तब्ध हैं। इंतजार है 26 की सुबह का, जो देश के लिए एक नए सवेरे का भी आगमन होगा।