वजन उठाना यानी वेटलिफ्टिंग सिर्फ मांसपेशियां बनाने के लिए नहीं है। सही तरीके से किया जाए तो इसका हृदय पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि यह प्रभाव सकारात्मक होगा या नकारात्मक, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वजन कैसे उठाया जा रहा है, कितनी सावधानी बरती जा रही है और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति कैसी है।
वेटलिफ्टिंग के फायदे
मांसपेशियों के विकास के साथ-साथ नियमित और सीमित मात्रा में वेटलिफ्टिंग करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है। यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी मददगार है। ये सभी फायदे दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में कारगर साबित होते हैं।
विभिन्न शोधों में पाया गया है कि सप्ताह में दो से तीन दिन हल्के से मध्यम वजन के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से रक्तचाप नियंत्रण में रहता है। इससे खराब कोलेस्ट्रॉल एलडीएल कम होता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल एचडीएल में बढ़ोतरी होती है। परिणामस्वरूप दिल का दौरा या स्ट्रोक होने का खतरा धीरे-धीरे कम होता है। विशेषज्ञों के अनुसार वेटलिफ्टिंग अप्रत्यक्ष रूप से हृदय को मजबूत बनाती है। मजबूत मांसपेशियों के कारण रोजमर्रा के कामों में शरीर पर कम दबाव पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के क्षय को रोकने में भी वेट ट्रेनिंग प्रभावी है, जो लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रखने में सहायक होती है।
समस्या कहां होती है?
गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा भारी वजन उठाने पर वेटलिफ्टिंग नुकसानदेह हो सकती है। बहुत भारी वजन उठाते समय कई लोग सांस रोक लेते हैं, जिससे अचानक रक्तचाप बढ़ सकता है। यह स्थिति हृदय रोगियों या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है। अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक ट्रेनिंग या ओवरट्रेनिंग से दिल पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और दिल की धड़कन असामान्य रूप से बढ़ सकती है। इसके कारण सीने में दर्द, दिल की धड़कन में गड़बड़ी, चक्कर आना या सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में यदि दिल पहले से कमजोर हो, तो हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि किसी को उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास हो या उम्र 40 वर्ष से अधिक हो, तो किसी भी तरह का भारी वजन उठाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
वेटलिफ्टिंग की शुरुआत हमेशा हल्के वजन से करनी चाहिए। सही पोस्चर में व्यायाम करना, सांस को सामान्य बनाए रखना और कार्डियो एक्सरसाइज के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि पहले से दिल से जुड़ी कोई समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के बिना वेटलिफ्टिंग न करें। प्रशिक्षित ट्रेनर की देखरेख में ही वेटलिफ्टिंग करना सबसे सुरक्षित तरीका है।