वॉशिंगटनः ईरान के संभावित नए नेतृत्व ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए खुलापन दिखाते हुए बातचीत के संकेत दिये हैं। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह दावा किया है।
यह बयान उस बड़े हमले के बाद आया है, जिसमें अमेरिकी और इज़राइली बलों ने तेहरान पर हमला कर ईरान के सर्वोच्च नेता और अन्य शीर्ष अधिकारियों को मार गिराया था।
गोपनीयता की शर्त पर इस अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन फिलहाल सैन्य अभियान बिना रुके जारी है। अधिकारी ने यह नहीं बताया कि ईरान का संभावित नया नेतृत्व कौन है या उन्होंने बातचीत की इच्छा कैसे जताई।
दूसरी ओर रविवार को ‘द अटलांटिक’ को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने भी कहा कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बात करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे बात करना चाहते हैं और मैंने सहमति दे दी है, इसलिए मैं उनसे बात करूंगा।” हालांकि उन्होंने बातचीत के समय को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।
यह संभावित कूटनीतिक पहल ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका-इज़राइल हमलों की विस्तृत योजना और ईरान में निशाना बनाए गए ठिकानों के बारे में नई जानकारियां सामने आ रही हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि बी-2 स्टेल्थ बमवर्षक विमानों ने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं पर 2,000 पाउंड के बम गिराए। यह रणनीति जून में अपनाई गई थी, जब ट्रंप ने तीन प्रमुख ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले के लिए बी-2 बमवर्षक भेजने की मंजूरी दी थी।
पिछले सप्ताह अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा था, जो अमेरिका तक पहुंच सकती थीं। शनिवार को ईरान पर हमले की घोषणा करते समय भी उन्होंने यही तर्क दोहराया।
हालांकि ईरान ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की बात स्वीकार नहीं की है। जबकि अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी ने पिछले साल एक सार्वजनिक रिपोर्ट में कहा था कि यदि तेहरान ऐसा करने का निर्णय लेता है तो वह 2035 तक सैन्य रूप से सक्षम अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल विकसित कर सकता है। हमलों से पहले सीआईए कई महीनों से ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई देश के कई वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। यह खुफिया जानकारी इज़राइली अधिकारियों के साथ साझा की गई थी और हमलों का समय भी आंशिक रूप से नेताओं की लोकेशन की जानकारी के आधार पर तय किया गया।
अमेरिका और इज़राइल के बीच खुफिया सहयोग से इस हमले की व्यापक तैयारी का संकेत मिलता है। खामेनेई की मौत के बाद इस्लामी गणराज्य का भविष्य अनिश्चित हो गया है और क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।