🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

चुनाव से पहले बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े, दहशत का माहौल

बढ़ती हिंसा से चिंतित हिंदू समुदाय, मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

By रजनीश प्रसाद

Feb 05, 2026 18:27 IST

ढाका : राष्ट्रीय चुनाव नजदीक आते ही बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के बीच भय का माहौल गहराता जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों और हिंदू नेताओं का कहना है कि हाल के महीनों में हिंदुओं पर हमलों में तेज बढ़ोतरी हुई है और प्रशासन इन घटनाओं को रोकने में नाकाम रहा है।

दिसंबर में 27 वर्षीय हिंदू परिधान श्रमिक दीपु चंद्र दास की नृशंस हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। उन पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद उनके कार्यस्थल पर भीड़ जुटी जिसने उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी शव को पेड़ से लटकाया और जला दिया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद ढाका सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को सजा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की।

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने जांच के आदेश दिए हैं और पुलिस के अनुसार लगभग एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कोई अलग-थलग मामला नहीं है। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के अनुसार अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से 2,000 से अधिक सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें कम से कम 61 हत्याएं, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 28 मामले और पूजा स्थलों पर 95 हमले शामिल हैं।

बांग्लादेश में हिंदू आबादी करीब 1.31 करोड़ है जो कुल जनसंख्या का लगभग 8 प्रतिशत है। चुनावों के दौरान पहले भी हिंसा बढ़ती रही है लेकिन इस बार स्थिति अधिक चिंताजनक मानी जा रही है। अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने और शेख हसीना के भारत में रहने के कारण हिंदुओं को एक खास राजनीतिक पक्ष से जुड़ा माना जा रहा है जिससे उनकी असुरक्षा और बढ़ गई है।

इसी बीच इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की राजनीति में वापसी ने भी चिंता बढ़ाई है। विश्लेषकों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में डर फैलाने के लिए हमलों का एक संगठित पैटर्न देखा जा रहा है जिसका असर अल्पसंख्यक मतदाताओं की चुनावी भागीदारी पर पड़ सकता है।

भारत ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताई है जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलेगी तब तक न्याय अधूरा रहेगा।

Prev Article
अबू धाबी में रूस-यूक्रेन शांति वार्ता का दूसरा दिन, उम्मीदें और चुनौतियाँ दोनों
Next Article
कश्मीर मुद्दे पर फिर सक्रिय हुआ पाकिस्तान, सॉलिडैरिटी डे बना मंच

Articles you may like: