डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अमेरिकी चुनावी पद्धति को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 'धांधली' और 'चोरी' का आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया है कि अमेरिकी चुनावी पद्धति अब पूरी दुनिया में मजाक का विषय बन गयी है।
रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर 'सेव अमेरिका एक्ट' की मांग की। उन्होंने दावा किया कि अगर हम इस सिस्टम को ठीक नहीं करते हैं तो हमारा देश नहीं बचेगा। रिपब्लिकन से इस मुद्दे पर एकजुट होकर लड़ने की अपील करते हुए उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस में एक नया बिल लाने की मांग की है।
क्या है ट्रंप की मांग?
ट्रंप अमेरिका में 3 नए और सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं :
1. वोटर ID जरूरी
हर मतदाता को वोट देने के लिए एक फोटो ID दिखानी होगी।
2. नागरिकता का सबूत
मतदाता के तौर पर रजिस्टर करने के लिए खुद उपस्थित होकर अमेरिकी नागरिकता का सबूत देना होगा।
3. मेल-इन बैलेट खत्म करें
बीमारी, दिव्यांगता, सेना या यात्रा के कारणों को छोड़कर मेल या 'मेल-इन बैलेट' पद्धति से वोटिंग पूरी तरह से बंद कर देनी होगी।
क्या सता रहा है मिडटर्म चुनावों में हार का डर?
ट्रंप अचानक इतने सख्त निर्वाचनी संशोधन की मांग क्यों कर रहे हैं? यह मांग अचानक नहीं है। साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में जो बाइडेन से हारने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप ने 'वोट चोरी' का मुद्दा ही उठाया था। वह अपनी हार को स्वीकार नहीं करना चाहते थे। कहा जाता है कि उनके भड़काऊ बयानों की वजह से उनके कट्टर समर्थकों ने कैपिटल हिल बिल्डिंग पर हमला किया था जो उससे पहले कभी नहीं हुआ था। अमेरिकी गणतंत्र ने हिंसात्म रूख देखा था।
फिर से चुनाव होने हैं। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव इस साल 3 नवंबर को होंगे। राजनैतिक गलियारों में सवाल घुम रहा है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप चुनावों के नतीजों को लेकर ही परेशान हैं? क्या वह हार के डर से 'वोट चोरी' का रोना रो कर पहले से ही जमीन तैयार कर रहे हैं?