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ओमान बातचीत से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को किया आगाह, जताई कड़ी चिंता

परमाणु समझौते पर अमेरिका–ईरान की अहम बातचीत से पहले बढ़ा दबाव, ट्रंप ने फिर दी चेतावनी।

By कौशिक दत्त, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 06, 2026 09:15 IST

वाशिंगटनः अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। शुक्रवार को ओमान में प्रस्तावित वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई पर सीधा निशाना साधते हुए कड़ा संदेश दिया है। ट्रंप ने कहा है कि इस बातचीत को लेकर ईरान के सर्वोच्च नेता को “बेहद चिंतित होना चाहिए।”

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने बैठने वाले हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, यह बैठक भारतीय समय के अनुसार सुबह 11:30 बजे (स्थानीय समय सुबह 10 बजे) शुरू होगी। इस बातचीत का उद्देश्य परमाणु समझौते की दिशा में आगे बढ़ना बताया गया है।

इस बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर ईरान पर दबाव बढ़ाया है। सीएनएन के अनुसार, एनबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने खामेनेई को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “ईरान के सर्वोच्च नेता को इस स्थिति को लेकर चिंतित होना चाहिए। बहुत चिंतित होना चाहिए। क्योंकि वे हमारे साथ बातचीत कर रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत को कभी औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया था।

ट्रंप इससे पहले भी ईरान को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर वह परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता, तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा था कि जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे। इसी दबाव के तहत अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों के पास अपने नौसैनिक बलों की मौजूदगी भी बढ़ाई है।

हालांकि, इन सबके बीच ईरान ने शर्तों के साथ बातचीत के लिए हामी भरी है। सीएनएन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका के चलते ईरान इस वार्ता के लिए तैयार हुआ है। इससे पहले बैठक के स्थान और बातचीत के स्वरूप को लेकर मतभेद सामने आए थे। पहले इस वार्ता के तुर्की में होने की संभावना थी, लेकिन अंततः ओमान की मध्यस्थता से सभी अड़चनें दूर हुईं।

अब सभी की नजरें ओमान में होने वाली इस बातचीत पर टिकी हैं, जिसे अमेरिका–ईरान संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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