कुआलालंपुर (मलेशिया): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत मलेशिया संबंधों की गहराई को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की सफलता स्वाभाविक रूप से मलेशिया की सफलता से जुड़ी है और अंततः यह एशिया की सफलता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच साझेदारी सामूहिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए भारत–मलेशिया साझेदारी की परिकल्पना से निर्देशित है।
मोदी भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मलेशिया की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। इस यात्रा का लक्ष्य आर्थिक, डिजिटल, सांस्कृतिक और जन-से-जन क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाना है।
कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की दो दिवसीय यात्रा पर आए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की उपलब्धियों को अपनी उपलब्धि के रूप में मनाते हैं। उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सद्भावनापूर्ण पहल का भी उल्लेख किया, जिनमें चंद्रयान-3 की सफलता पर दी गई शुभकामनाएँ शामिल हैं।
मोदी ने कहा “हम एक-दूसरे की सफलता को अपनी सफलता मानते हैं। चंद्रयान-3 की सफलता पर प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की शुभकामनाओं से मैं गहराई से भावुक हुआ। मैं आपसे सहमत हूं कि भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है। यह एशिया की सफलता है।”
द्विपक्षीय संबंधों के मार्गदर्शक ढांचे को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “इसीलिए मैं कहता हूँ कि हमारे संबंधों का मार्गदर्शक शब्द IMPACT है। यानी हमारे संबंधों की गति पर IMPACT, हमारी महत्वाकांक्षाओं के पैमाने पर IMPACT और हमारे लोगों के लाभ के लिए IMPACT। साथ मिलकर हम पूरी मानवता का भला कर सकते हैं।”
आर्थिक और तकनीकी सहयोग में हो रही प्रगति को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। वर्तमान में मलेशिया में 100 भारतीय आईटी कंपनियाँ कार्यरत हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग तेजी से बढ़ रहा है और भारत की प्रमुख डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) जल्द ही मलेशिया में शुरू की जाएगी। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमने मलेशिया की पहली और एशिया की सबसे बड़ी इंसुलिन विनिर्माण इकाई की स्थापना में योगदान दिया। मलेशिया में 100 से अधिक भारतीय आईटी कंपनियाँ काम कर रही हैं, जो हज़ारों नौकरियाँ पैदा कर रही हैं। मलेशिया-भारत डिजिटल काउंसिल हमारे डिजिटल सहयोग के लिए नए मार्ग प्रशस्त कर रही है। भारत की UPI जल्द ही मलेशिया आएगी।”
जन-से-जन संपर्क को संबंधों की नींव बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय महासागर के पार साझा भूगोल और सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा की।
उन्होंने कहा, “हम भारतीय महासागर के वही नीले जल साझा करते हैं। महासागर के उस पार, हम एक-दूसरे के यहाँ जाना पसंद करते हैं।” उन्होंने प्रवासी भारतीयों और उनके मलेशियाई मित्रों को भारत आने का निमंत्रण दिया।
प्रधानमंत्री ने भारत में हो रहे तेज़ बुनियादी ढांचा विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है, राजमार्ग रिकॉर्ड गति से बनाए जा रहे हैं और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में भारत में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। एक दशक में हमारे हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है। राजमार्ग रिकॉर्ड गति से बनाए जा रहे हैं। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा प्राप्त कर रही हैं। मैं आपको ‘इन्क्रेडिबल इंडिया’ का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करता हूँ। अपने मलेशियाई मित्रों को भी साथ लेकर आइए, क्योंकि जन-से-जन संपर्क हमारी मित्रता की आधारशिला है।”
भारत के आर्थिक परिवर्तन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “एक दशक में भारत ने अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। कभी हम 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे, आज हम शीर्ष तीन की ओर बढ़ रहे हैं। हम दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी हैं।‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलें अब परिपक्व हो चुकी हैं और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।