अगर साल 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल जीतकर फिर से सरकार का गठन करती है तो कोलकाता में एक नए सरकारी सहायता प्राप्त यूनिवर्सिटी का निर्माण किया जाएगा। इस बात की घोषणा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की। वह सरस्वती पूजा के दिन दोपहर में योगमाया देवी कॉलेज में पहुंची।
उस समय वहां उपस्थित आशुतोष कॉलेज के प्रिंसिपल मानस कवि ने मुख्यमंत्री को आशुतोष, योगमाया देवी और श्यामा प्रसाद कॉलेज को मिलाकर अलग यूनिवर्सिटी गठित करने का मौखिक प्रस्ताव दिया। बताया जाता है कि इस दौरान मानस कवि के साथ श्यामा प्रसाद कॉलेज के प्रिंसिपल अपूर्व चक्रवर्ती भी मौजूद थे।
दोनों कॉलेज के प्रिंसिंपल के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने स्वीकार भी कर लिया है लेकिन कुछ ही महीनों में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए विधानसभा का विस्तृत अधिवेशन नहीं हो सकेगा। इसलिए मुख्यमंत्री ने इस मामले में चुनावों के बाद ही सोच-विचार करने का आश्वासन दिया है। नवान्न सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भले ही अभी तक चुनावों की तारीखों की घोषणा नहीं की गयी है लेकिन चुनावी बिगुल बज चुका है।
इसलिए विधानसभा का सम्पूर्ण अधिवेशन नहीं हो रहा है। फरवरी के शुरुआत में विधानसभा चुनाव ऑन अकाउंट पेश किया जाएगा। इसलिए मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि अगर चुनाव के बाद सब कुछ ठीक रहा तो विधानसभा के बाद के अधिवेशन में विश्वविद्यालय गठन की प्रक्रिया को शुरू की जा सकती है।
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब इन तीन कॉलेजों को मिलाकर यूनिवर्सिटी गठन का प्रस्ताव दिया गया है। यह प्रस्ताव 2018-19 में भी दिया गया था। कहा जाता है कि तब भी मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी सहमति दे दी थी। हालांकि कॉलेजों ने यह प्रस्ताव नवान्न क्यों नहीं भेजा, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। पिछले डेढ़ साल से इस प्रस्ताव में बदलाव किया जा रहा है।
मानस कवि ने कहा कि आशुतोष ग्रुप ऑफ कॉलेज करीब सौ साल पुराना शैक्षणिक संस्थान है। मुख्यमंत्री भी हमारे ग्रुप ऑफ कॉलेज की पूर्व छात्रा रह चुकी हैं। वह हमारे बारे में सोचती हैं। सरस्वती पूजा के दिन हमने तीनों कॉलेजों को मिलाकर एक यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा था। यह हमारी बहुत पुरानी मांग थी क्योंकि वह हमारे कॉलेज की पूर्व छात्रा हैं।
हमने उनसे कहा है कि हमें तीनों कॉलेजों को मिलाकर एक यूनिवर्सिटी का तोहफा मिलना चाहिए। वह राज्य की अभिभावक भी हैं। हालांकि यूनिवर्सिटी का नाम क्या होगा, इसका फैसला कॉलेजों के प्रिंसिपल ने मुख्यमंत्री पर ही छोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम क्या होगा यह वही तय करेंगी। श्यामा प्रसाद कॉलेज के प्रिंसिपल अपूर्व चक्रवर्ती ने कहा, ‘आशुतोष, योगमाया देवी और श्यामा प्रसाद कॉलेज – एक ही परिवार हैं। हमने उत्सव के बीच मुख्यमंत्री को अपने करीब पाया। यह हमारे और छात्रों के लिए एक संदेश है। हम तीनों कॉलेज के प्रिंसिपल ने मिलकर ही यूनिवर्सिटी के गठन का प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया है। यह हमारे लिए बहुत बड़ा उपहार होगा।
गौरतलब है कि राज्य के 31 सरकारी विश्वविद्यालयों में से वर्तमान में कोलकाता, जादवपुर, रवींद्र भारती और प्रेसीडेंसी के साथ महानगर में संस्कृत कॉलेज और विश्वविद्यालय भी हैं। उच्च शिक्षा में साढ़े नौ लाख सीटों में से एक तिहाई भी इस साल नहीं भरी गई हैं। क्या इसके बावजूद तीन कॉलेजों के अस्तित्व को जीवित रखते हुए दक्षिण कोलकाता में एक नया विश्वविद्यालय स्थापित करने पर छात्र मिल पाएंगे?
यह सवाल शिक्षा के क्षेत्र के जानकार उठा रहे हैं। हालांकि मानस कवि व अन्य दोनों प्रिंसपिलों का मानना है कि प्रस्तावित यूनिवर्सिटी बांग्ला, अंग्रेजी, दर्शन, गणित, भौतिकी और वाणिज्य जैसे पारंपरिक विषयों या पाठ्यक्रमों में सिर्फ स्नातकोत्तर डिग्री की पढ़ाई नहीं होगी बल्कि आधुनिक, रोजगारोन्मुखी और यूनिवर्सल कोर्स के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।