पढ़ना चाहते थे कॉलेज A में लेकिन उसकी मेधा सूची में नाम नहीं आया बल्कि कम पसंद के कॉलेज B की मेधा सूची में नाम आ गया था। अब मरता क्या न करता के तर्ज पर कॉलेज B में ही दाखिला ले लिया लेकिन कॉलेज A में पढ़ने की ख्वाहिश दिल में कहीं दबकर रह गयी। हर साल ऐसे कई छात्र होते हैं जिन्हें इस तरह से मन मारकर दूसरे कॉलेजों में पढ़ना पड़ जाता है। लेकिन कलकत्ता यूनिवर्सिटी (CU) के छात्रों को अब एक नया मौका मिलने वाला है।
अगर किसी कारणवश किसी छात्र को अपने पसंदीदा कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाया तो 4 वर्षीय स्नातक कोर्स में तीसरे वर्ष के अंत में छात्रों को अपने मनपसंद वाले कॉलेज में पढ़ने का मौका मिलेगा।
बता दें, 4 वर्षीय स्नातक कोर्स में पढ़ने वाले छात्रों को रिसर्च-ग्रेजुएट कहा जाता है लेकिन यूनिवर्सिटी के अधीनस्थ कई कॉलेज ऐसे हैं जहां चौथे वर्ष के छात्रों को पढ़ाने की व्यवस्था नहीं है। जिन कॉलेजों में चौथे वर्ष के छात्रों की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है उन कॉलेजों के छात्रों को तीसरे वर्ष के अंत में दूसरे कॉलेज में पढ़ने का मौका प्रदान किया जाएगा।
यूनिवर्सिटी के अधीन 140 कॉलेजों में स्नातक की पढ़ाई होती है। यूनिवर्सिटी ने सर्वे करके यह जानने का प्रयास किया है कि इनमें से कितने कॉलेजों में चौथे वर्ष की पढ़ाई की व्यवस्था है। बड़ी संख्या में कॉलेजों में चौथे वर्ष की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होगी, यह एक प्रकार से निश्चित ही था। क्यों?
बताया जाता है कि चौथे वर्ष के शोधकेंद्रीत पढ़ाई के लिए कॉलेजों में कम से कम 2 पीएचडी अध्यापक, रिसर्च सेंटर, अच्छी गुणवत्ता वाली लैब और लाइब्रेरी की आवश्यकता होगी। जिन जगहों पर यह व्यवस्थाएं नहीं है वहां चौथे वर्ष के छात्रों को पढ़ाने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी। वहां के छात्रों को अब दूसरे कॉलेजों में पढ़ने का मौका दिया जाएगा।
क्या कहना है CU का?
इस बारे में CU के उपाचार्य आशुतोष घोष ने कहा, "मान लिया जाए कि किसी कॉलेज में चौथे वर्ष की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है लेकिन वहां बड़ी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जो चौथे वर्ष ग्रेजुएशन में पढ़ाई करेंगे। इन छात्र-छात्राओं के लिए आशुतोष कॉलेज, लेडी ब्रेबॉर्न कॉलेज, स्कॉटिश चर्च, बेथुन, मौलाना आजाद कॉलेज जैसे कॉलेज अपने दरवाजे खोल सकते हैं।" साथ ही उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन चौथे वर्ष की पढ़ाई के लिए शुरुआती तीनों वर्ष को मिलाकर कुल 75 प्रतिशत अंकों का होना अनिवार्य है।
उन्होंने आगे कहा तीसरे साल के अंत में योग्य कॉलेज चौथे वर्ष में छात्रों के दाखिले के लिए फिर से एडमीशन पोर्टल खोल सकते हैं। उन्हें पहले से विभाग के आधार पर यह बताना पड़ेगा कि कितनी सीटें खाली हैं। इसके बाद छात्र आवेदन कर सकेंगे। कॉलेज द्वारा निर्धारित कट-ऑफ के आधार पर मेधा सूची जारी की जाएगी। कई कॉलेज के प्रिंसिपलों ने इस पहल का स्वागत किया है।
प्रिंसिपलों ने कहा
आशुतोष कॉलेज के प्रिंसिपल व पश्चिम बंगाल के प्रिंसिपल परिषद के साधारण सचिव मानस कवि ने कहा कि इस पहल की वजह से छात्रों को अच्छे कॉलेजों में पढ़ने का सपना पूरा होगा उसके साथ ही जिन कॉलेजों में इन छात्रों के पढ़ने के लिए आवश्यक व्यवस्था है वे भी इन्हें पढ़ा सकेंगे। इसके साथ ही स्कॉटिश चर्च कॉलेज की प्रिंसिपल मधुमंजिरी मंडल ने कहा कि तीसरे वर्ष के अंत में दाखिले की प्रक्रिया कॉलेजों में हाथों में ही रहनी चाहिए।
हालांकि इसके बाद भी कुछ सवाल रह जाते हैं। इससे पहले भी राज्य में स्नात स्तर पर दाखिले में भ्रष्टाचार और रुपए लेकर सीटें बेचने जैसी घटनाएं देखी गई हैं। इसीलिए पिछले दो साल से उच्च शिक्षा विभाग ने पूरे राज्य में केंद्रीयकृत ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया का संचालन करवा रहा है।
अब सवाल यह उठा है कि अगर तीसरे साल के दाखिले की प्रक्रिया फिर से कॉलेजों के हाथों में दे दी गयी तो क्या फिर से भ्रष्टाचार का खतरा पैदा हो जाएगा? आशुतोष घोष ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा क्योंकि इस बार तो लाखों छात्र दाखिला नहीं लेंगे। संख्या काफी हद तक नियंत्रण में रहेगी।' हालांकि, प्रिंसिपल काउंसिल का मानना है कि यूनिवर्सिटी को दाखिले की प्रक्रिया का प्रबंधन करने के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनानी चाहिए ताकि यह समस्या फिर से न खड़ी हो जाए।