मुंबईः रिलायंस फाउंडेशन ने 21वें सेंचुरी स्किल्स कॉन्क्लेव में अपने स्किलिंग प्रोग्रामों का एक बड़ा मील का पत्थर छुआ है। अब तक 12 लाख से अधिक लोगों तक पहुँच, 3 लाख से अधिक युवाओं को दक्षता प्रदान की गई और 1.8 लाख युवाओं को रोजगार मिला।
इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री लीडर्स, स्किलिंग एक्सपर्ट्स और युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत के बदलते कौशल परिदृश्य और भविष्य की नौकरियों पर चर्चा की। कॉन्क्लेव का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवा रोजगार और दीर्घकालिक करियर मार्ग सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों ने कहा कि आज की दुनिया में सॉफ्ट स्किल्स और टेक्नोलॉजी-सक्षम कौशल की मांग सबसे अधिक है। महाराष्ट्र सरकार की वोकेशनल एजुकेशन डायरेक्टर, मधवी सरदेशमुख के अनुसार, “आज क्षमताओं का महत्व बढ़ गया है। डिग्री से अधिक, इंडस्ट्री-उन्मुख कौशल ही भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स तैयार करेगा।”
रिलायंस फाउंडेशन के स्किलिंग हेड नुपुर बहल ने कहा कि देश का डेमोग्राफिक डिविडेंड तभी स्थायी विकास में बदल सकता है, जब युवा भविष्य-उन्मुख कौशल से लैस होंगे। फाउंडेशन एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यक्तिगत स्किलिंग पथ प्रदान करता है और एनएसडीसी एवं एआईसीटीई जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर रोजगार-सक्षम कौशल प्रदान करता है।
पहले चरण में हजारों युवाओं को प्रशिक्षित कर फ्यूचर रेडी स्किल इनिशिएटिव पूरा किया गया। अब दूसरा चरण युवा पहुँच और इंडस्ट्री प्रासंगिक कौशल को और गहरा करने पर केंद्रित है।
कार्यक्रम के दौरान 40 युवा अचीवर्स का भी सम्मान किया गया, जिनमें से 24 वर्षीय कशिश सावत ने रिलायंस फाउंडेशन के प्रशिक्षण से अपनी पहली नौकरी पाई और कुछ ही महीनों में तेजी से करियर में उन्नति की।
रिलायंस फाउंडेशन की पहल इस बात को स्पष्ट करती है कि टेक्नोलॉजी और एआई-सक्षम स्किलिंग से युवा न केवल वर्तमान में रोजगार योग्य बन रहे हैं, बल्कि भविष्य के बदलते इंडस्ट्रीज के लिए भी तैयार हो रहे हैं।