नई दिल्ली: वैश्विक सड़क सुरक्षा संगठन इंटरनेशनल रोड फेडरेशन (IRF) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि सरकारी विभागों को निर्देश दें कि ठेके और खरीद आदेश केवल कम लागत के आधार पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए दिए जाएं।
IRF ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संशोधित जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) का हवाला देते हुए कहा कि परियोजनाओं को क्वालिटी-कम-कॉस्ट-आधारित चयन (QCBS) के तहत दिया जा सकता है, जहां गुणवत्ता का वजन 30 प्रतिशत और लागत का 70 प्रतिशत हो।
हालांकि, IRF के अध्यक्ष एमेरिटस के. के. कपिला ने पत्र में कहा कि नई GFR नियमावली लागू होने के बावजूद ठेके सबसे कम बोली लगाने वालों को ही दिए जा रहे हैं, जिससे काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि "ठेके अभी भी सबसे कम बोली लगाने वाले को दिए जा रहे हैं। ठेके उद्योग में कभी-कभी असामान्य रूप से कम दरों का प्रस्ताव आता है, जिससे काम की गुणवत्ता घटती है, मध्यस्थता लंबी हो जाती है और अदालत में लंबी प्रक्रिया होती है।"
IRF ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे संबंधित सचिवों को निर्देश दें कि वे अपने अधीन आने वाले कार्यालयों को GFR नियमों का पालन करने और उचित गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त हिदायत दें।
जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) 2017 भारत सरकार की वित्त मंत्रालय द्वारा जारी व्यापक निर्देश हैं, जो सार्वजनिक वित्तीय लेनदेन में जवाबदेही, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करते हैं। ये नियम सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और संबद्ध संस्थाओं पर लागू होते हैं। GFR के तहत सरकारी खरीद के लिए Government e-Marketplace (GeM) का उपयोग करना अनिवार्य है और वित्तीय लेनदेन में पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
IRF का कहना है कि सरकारी ठेकों में गुणवत्ता को नजरअंदाज करना न केवल परियोजनाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है बल्कि सड़क सुरक्षा और जनता की सुरक्षा पर भी असर डालता है।