नई दिल्लीः केंद्रीय बजट 2026-27 की औपचारिक तैयारियों ने मंगलवार को अंतिम चरण में प्रवेश कर लिया, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परंपरागत ‘हलवा समारोह’ में हिस्सा लिया। यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि उस सख्त गोपनीय प्रक्रिया की शुरुआत है, जिसके तहत बजट से जुड़े अधिकारी ‘लॉक-इन पीरियड’ में प्रवेश करते हैं और देश का सबसे अहम वित्तीय दस्तावेज अंतिम रूप लेता है।
रायसीना हिल स्थित नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में आयोजित यह समारोह इस लिहाज से भी प्रतीकात्मक रहा कि वित्त मंत्रालय अब आधुनिक कर्तव्य भवन में शिफ्ट हो चुका है, लेकिन बजट की आत्मा से जुड़ी यह परंपरा आज भी नॉर्थ ब्लॉक से ही निभाई जा रही है। कारण साफ है-वहीं स्थित है वह ऐतिहासिक बजट प्रेस, जिसने चार दशकों तक बजट दस्तावेजों को आकार दिया।
हलवा समारोह: रस्म नहीं, जिम्मेदारी का संकेत
हलवा समारोह को बजट टीम के लिए एक तरह का ‘संकेत’ माना जाता है-अब बाहरी दुनिया से संपर्क टूटेगा और पूरी ऊर्जा बजट दस्तावेज को अंतिम रूप देने में लगेगी। इस दौरान अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में सीमित संपर्क के साथ काम करते हैं ताकि किसी भी तरह की सूचना लीक न हो।
डिजिटल युग में बजट अब कागज पर कम और स्क्रीन पर ज्यादा दिखाई देता है। वहीं लॉक-इन की अवधि भी पहले के दो सप्ताह से घटकर अब लगभग पांच दिन रह गई है। फिर भी गोपनीयता की गंभीरता में कोई कमी नहीं आई है।
डिजिटल बजट, लेकिन परंपरा जीवित
2014 के बाद मोदी सरकार ने बजट प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए-रेल बजट का विलय, फरवरी की शुरुआत में बजट पेश करना और 2021 से पूरी तरह पेपरलेस बजट। इसके बावजूद हलवा समारोह का जारी रहना यह दर्शाता है कि तकनीकी बदलावों के बीच संस्थागत परंपराओं को भी महत्व दिया जा रहा है।
बजट 2026-27 भी पूरी तरह डिजिटल रूप में पेश किया जाएगा। बजट से जुड़े सभी दस्तावेज-वित्त विधेयक, मांग अनुदान, वार्षिक वित्तीय विवरण-‘यूनियन बजट मोबाइल ऐप’ और वेबसाइट पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होंगे।
आर्थिक संदर्भ: 7.6% विकास दर और वैश्विक दबाव
यह बजट ऐसे समय में पेश हो रहा है जब भारतीय अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की अनुमानित विकास दर के साथ दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनी हुई है। हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन दबाव और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताएं नीति निर्माताओं के सामने चुनौती हैं।
निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी। अपने आप में यह एक रिकॉर्ड है। ऐसे में यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह संकेत देगा कि सरकार विकास, निवेश, रोजगार और राजकोषीय अनुशासन के बीच कैसे संतुलन साधती है।
नॉर्थ ब्लॉक: बजट इतिहास का साक्षी
1980 से 2020 तक नॉर्थ ब्लॉक का बेसमेंट बजट प्रिंटिंग का केंद्र रहा है। इससे पहले बजट दस्तावेज राष्ट्रपति भवन और फिर मिंटो रोड पर छपते थे। सूचना लीक की घटनाओं के बाद बजट प्रिंटिंग को एक सुरक्षित सरकारी परिसर में लाया गया।
आज जब बजट डिजिटल हो चुका है, तब भी नॉर्थ ब्लॉक उस ऐतिहासिक निरंतरता का प्रतीक बना हुआ है-जहां परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चलती हैं।