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ड्यूटी बढ़ोतरी से सिगरेट उद्योग पर दबाव, अगले वित्त वर्ष में 6–8% घट सकती है खपत

अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और GST बढ़ने से वॉल्यूम पर असर, लेकिन मजबूत मार्जिन और नकदी से कंपनियां संभालने की स्थिति में।

By श्वेता सिंह

Jan 28, 2026 18:15 IST

नई दिल्लीः अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाए जाने और 1 फरवरी से जीएसटी दर बढ़ने के बाद घरेलू सिगरेट उद्योग को अगले वित्त वर्ष में 6-8 प्रतिशत तक वॉल्यूम में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक, कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर मांग पर पड़ेगा, खासकर मूल्य-संवेदनशील सेगमेंट में।

फिलहाल सिगरेट पर 28 प्रतिशत जीएसटी और मुआवजा उपकर (कम्पनसेशन सेस) लगता है। 1 फरवरी से सेस हटाकर सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति स्टिक 2.05 रुपये से 8.5 रुपये तक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। इसके साथ ही अंतिम कीमत पर प्रभावी जीएसटी बढ़कर 40 प्रतिशत हो जाएगा।

क्रिसिल के अनुसार, 65 मिमी से अधिक लंबाई वाली मिड और प्रीमियम सिगरेट पर प्रति स्टिक 3.6 से 8.5 रुपये तक शुल्क लगेगा, जबकि 65 मिमी से कम लंबाई वाली मास सेगमेंट सिगरेट पर 2.05 से 2.1 रुपये प्रति स्टिक शुल्क तय किया गया है। मिड और प्रीमियम सेगमेंट में ड्यूटी बढ़ोतरी मौजूदा एमआरपी का लगभग 25 प्रतिशत तक है, जिसे कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, क्योंकि इस वर्ग में ब्रांड लॉयल्टी अधिक होती है।

इसके उलट, मास सेगमेंट (जो कुल वॉल्यूम का 40-45 प्रतिशत है) अत्यधिक मूल्य-संवेदनशील है। यहां ड्यूटी बढ़ोतरी लगभग 15 प्रतिशत तक सीमित है और कंपनियों के इसका एक हिस्सा खुद वहन करने की संभावना है, ताकि बिक्री में तेज गिरावट से बचा जा सके। इसका असर उद्योग के EBIT मार्जिन पर 200-300 बेसिस पॉइंट तक पड़ सकता है।

हालांकि, क्रिसिल का कहना है कि सिगरेट कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहेगी। तीन प्रमुख कंपनियां, जो संगठित बाजार के 95 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं, लगभग कर्ज-मुक्त हैं और इनके पास 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नकदी उपलब्ध है। इससे वे मार्जिन पर दबाव के बावजूद क्रेडिट प्रोफाइल और उत्पाद नवाचार बनाए रखने में सक्षम रहेंगी।

पिछले अनुभव भी सतर्कता की ओर इशारा करते हैं। 2014 से 2018 के बीच लगातार ड्यूटी बढ़ोतरी से सिगरेट की कीमतों में 40–50 प्रतिशत तक इजाफा हुआ था, जिसके चलते वॉल्यूम में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई थी। उस नुकसान की भरपाई में उद्योग को 3-4 साल लगे। इसी कारण इस बार कंपनियों के दाम बढ़ाने में संतुलित रुख अपनाने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, निकट भविष्य में सिगरेट उद्योग पर दबाव जरूर रहेगा, लेकिन मजबूत मार्जिन (58 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान), पर्याप्त नकदी और कर्ज-मुक्त बैलेंस शीट के चलते यह झटका सीमित रहने की संभावना है।

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