नई दिल्ली : विश्व अर्थव्यवस्था की गति ठहर जाने के बावजूद भारत आने वाले दो वर्षों में दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखेगा। इसे हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ओर से बताया गया। IMF ने कहा है कि 2025 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत हो सकती है। 2026 और 2027 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर कुछ कम हो सकती है फिर भी यह स्थिरता के साथ 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। यह पूर्वानुमान जनवरी 2026 में प्रकाशित वर्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में दिया गया है।
IMF के आंकड़ों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना में इस समय विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर काफी कम रहेगी। 2025 और 2026 में विश्व अर्थव्यवस्था लगभग 3.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। 2027 में यह गिरकर 3.2 प्रतिशत हो सकती है। इससे भारत और बाकी देशों की वृद्धि के बीच अंतर और स्पष्ट हो रहा है।
IMF का मानना है कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति भी दबाव में रहेगी। इसमें कहा गया है कि उन्नत देशों की औसत वृद्धि अगले कुछ वर्षों में केवल 1.7 से 1.8 प्रतिशत के बीच रहेगी। अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2026 में 2.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। यूरो क्षेत्र की वृद्धि केवल 1.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जापान में भी वृद्धि की गति कमजोर रहने का संकेत मिला है।
एशिया की बड़ी ताकत चीन की आर्थिक वृद्धि की गति भी घट रही है। IMF के पूर्वानुमान के अनुसार 2026 में चीन की जीडीपी 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है और 2027 में यह 4 प्रतिशत तक गिर सकती है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि एशिया में वृद्धि की मुख्य चालिका शक्ति के रूप में भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
केवल वृद्धि ही नहीं, भारत की बड़ी ताकत है स्थिरता ऐसा IMF का मानना है। ब्राजील की वृद्धि 2025 में 2.5 प्रतिशत से घटकर 2026 में 1.6 प्रतिशत रह सकती है। बाद में 2027 में यह 2.3 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। मेक्सिको की आर्थिक वृद्धि 0.6 प्रतिशत से बढ़कर 2027 में 2.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रूस की वृद्धि 1 प्रतिशत से कम रहेगी। वहीं भारत 7.3 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत पर आकर अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी अधिक स्थिर रहेगा। IMF के अनुसार यही निरंतरता भारत को विश्व अर्थव्यवस्था में अलग पहचान दिला रही है।