मुंबईः जैसे-जैसे हमारे जीवन के अधिकतर कार्य ऑनलाइन हो गए हैं, साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। डेटा चोरी, पहचान के गलत इस्तेमाल और फ्रॉड जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। ऐसे में साइबर इंश्योरेंस व्यक्तिगत और पारिवारिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है।
भारत में डिजिटल लेन-देन और साइबर फ्रॉड का बढ़ता ग्राफ
SBI General Insurance की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दिसंबर 2025 में 21.63 बिलियन डिजिटल लेन-देन हुए, जिनकी कुल राशि 27.97 ट्रिलियन रुपये थी। इसी डिजिटल विस्तार के साथ साइबर फ्रॉड में भी वृद्धि हुई। 2024 में साइबर अपराधों से नुकसान 22,845.73 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 2023 की तुलना में 206% अधिक है।
Cyber VaultEdge के प्रमुख लाभ:
पहचान चोरी से सुरक्षा: वित्तीय नुकसान और कानूनी सहायता शामिल।
अधिकृत फंड एक्सेस से नुकसान की भरपाई: बैंक अकाउंट, क्रेडिट/डेबिट कार्ड और डिजिटल वॉलेट सुरक्षा।
आईटी विशेषज्ञ और डेटा पुनर्प्राप्ति: तकनीकी नुकसान की भरपाई और डेटा बहाली।
मनोवैज्ञानिक सहायता: साइबर अपराध से उत्पन्न तनाव और मानसिक प्रभाव के लिए काउंसलिंग।
आय की हानि की भरपाई: पहचान चोरी के कारण हुई आय की क्षति को कवर।
पारिवारिक विस्तार: पॉलिसी के तहत परिवार के सदस्य भी सुरक्षा में शामिल।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती डिजिटल निर्भरता और साइबर खतरों के कारण हर डिजिटल-फर्स्ट भारतीय के लिए साइबर इंश्योरेंस अब अनिवार्य हो गया है। यह न केवल वित्तीय नुकसान को कम करता है, बल्कि उपयोगकर्ताओं को डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाता है।
SBI General Insurance की पहुंच और सेवाएं
SBI General Insurance अपने देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा की यह सुविधा प्रदान करता है। कंपनी की पॉलिसी Cyber VaultEdge न केवल वित्तीय सुरक्षा देती है, बल्कि तकनीकी और मानसिक समर्थन के माध्यम से ग्राहकों को समग्र सुरक्षा का भरोसा भी देती है।
भारत में डिजिटल ट्रांजैक्शन की बढ़ती संख्या और साइबर अपराध में हुई तेज वृद्धि दर्शाती है कि डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि आर्थिक और मानसिक सुरक्षा की भी आवश्यकता है। साइबर इंश्योरेंस लोगों को सुरक्षित, सतर्क और आत्मविश्वासी डिजिटल जीवन जीने में मदद करता है।