नई दिल्लीः वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत का सेवा क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार बना हुआ है। यह क्षेत्र देश के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में आधे से अधिक का योगदान देता है और रोजगार सृजन, निर्यात तथा निवेश में अहम भूमिका निभाता है।
सर्वेक्षण के अनुसार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सेवा क्षेत्र ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है और अब पारंपरिक विकास कारकों से आगे बढ़कर उभरते उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों की ओर संक्रमण कर रहा है। हाल के वर्षों में भारत का सेवा क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में लगातार बेहतर प्रदर्शन करता रहा है। इसे मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक संपर्कों से समर्थन मिला है।
सर्वेक्षण में यह भी रेखांकित किया गया है कि पिछले एक दशक में वैश्विक सेवा व्यापार की वृद्धि वस्तु व्यापार की तुलना में तेज रही है। इस विस्तार में आईटी, व्यावसायिक सेवाएं, वित्त और पेशेवर सेवाओं जैसी ज्ञान-आधारित सेवाओं की प्रमुख भूमिका रही है। भारत ने विशेष रूप से आईटी और डिजिटल माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक सेवाओं के प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। कुशल कार्यबल, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीक अपनाने के कारण भारत वाणिज्यिक सेवाओं के शीर्ष वैश्विक निर्यातकों में शामिल बना हुआ है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सीमा-पार डेटा प्रवाह के बढ़ते महत्व ने वैश्विक सेवा बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को और मजबूत किया है।
सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि महामारी के बाद की अवधि में भारत के सेवा क्षेत्र में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे पर्यटन, आतिथ्य, परिवहन और व्यापार जैसे संपर्क-आधारित क्षेत्रों में आई तेजी से समर्थन मिला है। जीएसटी संग्रह, ई-वे बिल, हवाई यात्री यातायात और होटल अधिभोग दर जैसे उच्च-आवृत्ति संकेतक सेवा गतिविधियों में निरंतर गति की ओर इशारा करते हैं। सेवा क्षेत्र ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा हिस्सा भी आकर्षित किया है, जो भारत की विकास संभावनाओं में निवेशकों के निरंतर भरोसे को दर्शाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि जहां आईटी और आईटी-सक्षम सेवाएं अब भी केंद्र में हैं, वहीं नए क्षेत्र भी तेजी से विकास में योगदान दे रहे हैं। वित्तीय सेवाओं का विस्तार डिजिटल पहुंच बढ़ने और औपचारिकरण के चलते हुआ है। रियल एस्टेट और निर्माण से जुड़ी सेवाओं को शहरीकरण और आवासीय मांग से लाभ मिला है, जबकि लॉजिस्टिक्स और परिवहन सेवाएं अवसंरचना विस्तार और नीतिगत सुधारों से मजबूत हुई हैं। पर्यटन और यात्रा सेवाओं में घरेलू पर्यटन में वृद्धि और बेहतर संपर्क व्यवस्था के कारण तेज़ पुनरुद्धार देखा गया है।
सर्वेक्षण ने फिनटेक, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) जैसी उभरती सेवाओं की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया है। आर्थिक सर्वेक्षण ने सेवा-आधारित विकास को बनाए रखने के लिए कौशल विकास को मजबूत करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और नियामक ढांचे को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सर्वेक्षण में डिजिटल तकनीकों के उपयोग, कारोबार सुगमता में सुधार और वैश्विक सेवा मूल्य शृंखलाओं के साथ भारत के एकीकरण को और गहरा करने का आह्वान किया गया है। सहायक नीतियों और मानव संसाधन व तकनीक में निरंतर निवेश के साथ, भारत का सेवा क्षेत्र स्थिरता से आगे बढ़कर नए विकास क्षितिज की ओर अग्रसर होने और देश के आर्थिक परिवर्तन का मजबूत स्तंभ बने रहने की पूरी क्षमता रखता है।