कोलकाता : 49वाँ कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में हिंदी साहित्य की सशक्त उपस्थिति एक बार फिर देखने को मिली जब वाणी प्रकाशन के स्टाल पर कवि कुंभ के अंतर्गत काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि किताबों के बिना दुनिया जंगल जैसी हो जाएगी जहां पेड़ तो होंगे लेकिन चिड़ियों का गान नहीं होगा। उन्होंने कोलकाता पुस्तक मेले को जीवन का उत्सव बताते हुए कहा कि यह मेला पाठकों, लेखकों और विचारों को जोड़ने का बड़ा मंच है।
काव्य पाठ सत्र में शैलेंद्र शांत, सुरेश शा, राज्यवर्द्धन, रंजीता सिंह ‘फ़लक’, आनंद गुप्ता, अनिला राखेचा, शिवम तिवारी, मनीषा गुप्ता, विकास कुमार, दिव्या सक्सेना, सूर्य देव रॉय, नैना प्रसाद, अजय पोद्दार और सत्यम पांडेय ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। कविताओं में समाज, संवेदना, समय और मनुष्यता के विविध रंग देखने को मिले जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।
इस अवसर पर पद्माकर व्यास, राकेश कुमार, चंदन चौधरी, सुमित कुमार, हंसराज, राजदीप साहा, आकांक्षा आदित्य, रुपल साव, अनूप प्रसाद, अनिल साह, राजेश सिंह, अनामिका सिंह, दिव्या पांडे और रजनीश कुमार सहित बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल और सुचारु संचालन रूपेश कुमार यादव ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन देते हुए संस्कृति कर्मी संजय जायसवाल ने कहा कि पुस्तकें हमें आपस में जोड़ती हैं और कविताएं मनुष्यता को बचाए रखती हैं। उन्होंने वाणी प्रकाशन के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रकाशन पुस्तक, पाठक, लेखक और प्रकाशक के बीच एक सशक्त चतुर्भुज का निर्माण कर रहा है।
वाणी प्रकाशन की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि 26 जनवरी को पुस्तक मेला प्रांगण के प्रेस कार्नर में दोपहर डेढ़ बजे अज्ञेय, शंभुनाथ, शर्मिला जालान, उमा झुनझुनवाला और अनिला राखेचा की हिंदी पुस्तकों का लोकार्पण किया जाएगा। इस कार्यक्रम में अरुण कुमार माहेश्वरी की विशेष उपस्थिति रहेगी।