कोलकाता : 49वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले का शुभारंभ हो चुका है और आज मेले का दूसरा दिन रहा। 23 जनवरी होने के कारण यह दिन पुस्तक प्रेमियों और पाठकों के लिए विशेष महत्व का रहा। आज बसंत पंचमी है जिसे सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर राज्य के सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सरस्वती पूजा आयोजित की गई और प्रसाद वितरण के बाद छुट्टी घोषित की गई। इसी कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी आज कोलकाता पुस्तक मेले में पहुंचे।
आज का दिन इसलिए भी खास रहा क्योंकि 23 जनवरी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। इस अवसर पर कई सरकारी दफ्तरों और कुछ गैर-सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहा। छुट्टी का लाभ उठाते हुए परिवारों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने बड़ी संख्या में पुस्तक मेले का रुख किया। आयोजकों के अनुसार आज लगभग 2.5 लाख लोग पुस्तक मेले में पहुंचे जिससे पूरे मेला परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
मेले में गेट नंबर 6 से प्रवेश करते ही पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बनाया गया विशेष स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा। इस स्टॉल में बंगाल की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और राज्य सरकार की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी जानकारियों और चित्रों का प्रदर्शन किया गया है। इसी स्टॉल के एक हिस्से में छोटा पंडाल बनाकर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई है। बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सुबह लगभग 12 बजे विधि-विधान से सरस्वती पूजा संपन्न हुई।
मां सरस्वती को विद्या की देवी माना जाता है और पुस्तकों से उनका गहरा संबंध है। अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में सरस्वती पूजा का आयोजन भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करता है। आज विद्यार्थियों, पाठकों और पुस्तक प्रेमियों की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि कोलकाता पुस्तक मेला केवल पुस्तकों का बाजार नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है।