कोलकाता : कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का इस वर्ष 49वां आयोजन हो रहा है। यह मेला केवल पुस्तकों का उत्सव ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी मेला ज्ञान, कला और संस्कृति के विभिन्न रंगों को एक साथ प्रस्तुत कर रहा है। इसी कड़ी में मेले के प्रवेश द्वार संख्या एक के पास बंगाली सिनेमा के इतिहास और महानायक उत्तम कुमार को समर्पित एक विशेष स्टॉल लगाया गया है, जो दर्शकों और पाठकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
इस स्टॉल में महानायक उत्तम कुमार के जीवन और उनके सिनेमाई सफर से जुड़े अनेक दुर्लभ और महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रदर्शित किया गया है। उनके द्वारा अभिनीत फिल्मों में उपयोग किए गए वस्त्र, पोशाक, हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्र, बर्तन और अन्य निजी वस्तुएं यहां देखने को मिल रही हैं। ये वस्तुएं न केवल उनके अभिनय की याद दिलाती हैं, बल्कि उस दौर के सिनेमा की जीवनशैली और कला को भी सामने लाती हैं।
स्टॉल की दीवारों पर बंगाली और हिंदी सिनेमा से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को चित्रों और स्लाइड्स के माध्यम से दर्शाया गया है। लगभग 100 वर्षों के बंगाली सिनेमा के इतिहास को हर दशक के अनुसार अलग-अलग स्लाइड्स में प्रस्तुत किया गया है। इससे दर्शकों को यह समझने का अवसर मिलता है कि किस प्रकार रंगमंच से निकलकर सिनेमा ने समाज में अपनी गहरी पहचान बनाई।
बंगाली सिनेमा ने न केवल भारतीय फिल्म जगत को समृद्ध किया है, बल्कि विश्व सिनेमा पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। रवींद्रनाथ टैगोर, सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक और मृणाल सेन जैसे महान रचनाकारों ने इस परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई। कानन देवी से लेकर उत्तम कुमार, सौमित्र चटर्जी और छबी बिस्वास तक, हर दौर ने सिनेमा को नई ऊंचाइयां दी हैं।
यह प्रदर्शनी बंगाली सिनेमा के इसी समृद्ध और बहुआयामी इतिहास का उत्सव है। पुस्तक मेला आए सिनेमा प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए यह स्टॉल अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उन्हें कला, संस्कृति और इतिहास की एक यादगार यात्रा पर ले जाता है।