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कोलकाता पुस्तक मेला में इतिहास पर संवाद और कई नई हिंदी पुस्तकों का लोकार्पण

डॉ. शंभुनाथ की नई पुस्तक ‘छायावाद का देश’, नंदकिशोर आचार्य द्वारा संपादित ‘अज्ञेय : सप्तक समग्र’, शर्मिला जालान के कहानी संग्रह ‘साख’, उमा झुनझुनवाला के कविता संकलन ‘मैं और मेरा मन’ ,शिंजनी के कविता संग्रह 'घूमंतू औरत' और अनिला राखेचा के काव्य संग्रह ‘काजल की मेड़’ का लोकार्पण हुआ।

By रजनीश प्रसाद

Jan 27, 2026 12:38 IST

कोलकाताः कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला के प्रेस कॉर्नर सभागार में वाणी प्रकाशन और भारतीय भाषा परिषद के एक आयोजन में वाणी प्रकाशन से प्रकाशित डॉ. शंभुनाथ की नई पुस्तक ‘छायावाद का देश’, नंदकिशोर आचार्य द्वारा संपादित ‘अज्ञेय : सप्तक समग्र’, शर्मिला जालान के कहानी संग्रह ‘साख’, उमा झुनझुनवाला के कविता संकलन ‘मैं और मेरा मन’ ,शिंजनी के कविता संग्रह 'घूमंतू औरत' और अनिला राखेचा के काव्य संग्रह ‘काजल की मेड़’ का लोकार्पण हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित लेखकों और पाठकों का स्वागत करते हुए वाणी प्रकाशन के प्रबंधक निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि आज की नई पीढ़ी को नई किताबों और नए विचारों की जरूरत है। पुस्तक मेले में हिंदी की भागीदारी बढ़नी चाहिए।

इस अवसर पर ’इतिहास : तथ्य बरक्स भ्रांति’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि जिस देश में सांस्कृतिक विविधता है, वहाँ ऐतिहासिक तथ्यों की व्याख्या में सावधानी की जरूरत है। ऐसे भी जहां इतिहास गूंगा रहता है वहां साहित्य बोलता है। इतिहास को किसी भी राजनीति का ग़ुलाम नहीं होना चाहिए। इतिहास को ऐसा नहीं होना चाहिए कि अतीत भविष्य पर बोझ बन जाए। रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के प्रो. हितेन्द्र पटेल ने कहा कि इतिहास खास तरीके से अतीत में उतरने का नाम है लेकिन कई बार इतिहास केवल भ्रांतियों के रूप में पहुँचता है। इतिहास में अतीत वर्तमान को दिशा दिखाता है। जो जाति अतीत के प्रति सचेत नहीं रहेगी, उसका विनाश संभव है।

विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो. इंद्रनील आचार्य ने कहा कि आज हम सांस्कृतिक विस्मृति के दौर में जी रहे हैं और यह औपनिवेशिक काल से ही शुरू हो चुका है। जनजातीय भाषाओं को तो विस्मृत करने का काम एक षड्यंत्र के तहत औपनिवेशिक काल से ही हो रहा है। वरिष्ठ लेखक मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि आज इसपर ध्यान जाने की जरूरत है कि भ्रांति को उत्पन्न कौन कर रहा है और कौन इसे फैला रहा है। भ्रांति हमेशा एक खास मकसद से उत्पन्न की जाती है। जो आगे नहीं देख पाते हैं, वे ही भ्रांति उत्पन्न करते हैं और इसे फैलाते हैं।

उत्तर बंग विश्वविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मनीषा झा ने कहा कि इतिहास केवल तथ्यों का समूह नहीं है बल्कि इतिहास से भाषा, संस्कृति और सभ्यता का ज्ञान होता है। अभी स्त्रियों का इतिहास लिखा जाना शेष है। राजेश साव ने कहा कि इतिहास हमारी सामूहिक स्मृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तथ्य और भ्रांति में अंतर यह है कि तथ्य सकारात्मक होते हैं, वहीं भ्रांतियां नकारात्मक होती हैं। पुस्तक पढ़ने की संस्कृति हमें भ्रांतियों से बचने में मदद करेगी।

कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि जो चीजें इतिहास में छूट जाती हैं, साहित्य उसे समेटने का काम करता है। आजकल अक्सर मिथक को इतिहास बना कर पेश करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें तथ्य कम और भ्रांतियां अधिक रहती है। आज हमें अधिक सचेत होकर इतिहास से गुजरने और जरूरी हस्तक्षेप करने की जरूरत है। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि साहित्य की यज्ञशाला ऐसे ज्वलंत विषयों पर निरंतर चर्चा की जरूरत है।

इस अवसर पर उमा झुनझुनवाला और अनिला राखेचा ने काव्य पाठ किया तथा कथाकार शर्मिला जालान ने अपनी रचना प्रक्रिया पर वक्तव्य रखा। कोलकाता पुस्तक मेले के सभागार में इस अवसर पर प्रो.मंजुरानी सिंह,महेश जायसवाल, यशवंत सिंह, शंभु प्रसाद,अभिज्ञात, अमित राय, सुमिता चट्टोराज, पद्माकर व्यास, श्वेतांक सिंह, राज्यवर्द्धन, अल्पना नायक, नमिता जायसवाल, संजय राय, संजय दास, अभिलाष गौड़, सुशील पांडेय, रजनीश प्रसाद,विकास जायसवाल, रूपल साव, इबरार खान, हंस राज, आकांक्षा आदित्य, मार्टिना चक्रवर्ती, भोला साहा, शिप्रा मिश्रा, सुषमा पटेल,दीपो श्री,सूर्य देव रॉय, शिवम तिवारी,रूपेश यादव ,कंचन भगत, सोमैया सर्बत, अनूप प्रसाद सहित दर्जनों साहित्यप्रेमी और लेखक उपस्थित थे।

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रिकॉर्ड 32 लाख पाठकों संख्या के साथ संपन्न हुआ कोलकाता पुस्तक मेला

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