कोलकाता : कोलकाता जिसे साहित्य और संस्कृति की राजधानी कहा जाता है, आज से अपने सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक 49वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले की मेजबानी करने जा रहा है। शाम 4 बजे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मेले का उद्घाटन करेंगी जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी यह मेला केवल पुस्तकों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कला, विचार और संस्कृति का भव्य संगम बनेगा।
कोलकाता पुस्तक मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव है जो शहर के साहित्यिक हृदय और बौद्धिक चेतना को प्रतिबिंबित करता है। दुर्गा पूजा के बाद इसे बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। लाखों पाठक, लेखक, प्रकाशक और कलाकार इस आयोजन में भाग लेकर इसे विश्व में एक अनूठी पहचान दिलाते हैं। इस वर्ष अर्जेंटीना को थीम कंट्री के रूप में आमंत्रित किया गया है जो अपने समृद्ध साहित्य और संस्कृति के माध्यम से मेले को अंतरराष्ट्रीय रंग प्रदान करेगा।
भारत में पुस्तक मेले की परंपरा की जड़ें वर्ष 1918 तक जाती हैं जब नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन ने कॉलेज स्ट्रीट में पहली पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित की थी। स्वदेशी आंदोलन की भावना से प्रेरित इस आयोजन का नेतृत्व रवीन्द्रनाथ टैगोर, लाला लाजपत राय और विपिन चंद्र पाल जैसे महान विचारकों ने किया था।
आधुनिक कोलकाता पुस्तक मेले की शुरुआत 1975–76 में हुई जब विक्टोरिया मेमोरियल के पास पहले मेले का आयोजन किया गया। तब से लेकर आज तक यह मेला एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पुस्तक मेला बन चुका है। 49वां संस्करण एक बार फिर यह सिद्ध करेगा कि कोलकाता सचमुच पुस्तकों का शहर है।