कोलकाता : अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में जहाँ एक ओर 1000 से अधिक प्रकाशकों के भव्य स्टॉल पाठकों को आकर्षित कर रहे हैं वहीं इनके बीच स्थापित एक लाइब्रेरी स्टॉल विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार और आईआईटी खड़गपुर के सहयोग से विकसित नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया (NDLI) का यह स्टॉल मेले में ज्ञान की नई परिभाषा प्रस्तुत कर रहा है। समाचार एई समय के स्टॉल के ठीक बगल में स्थित स्टॉल नंबर 194 पर बना यह डिजिटल लाइब्रेरी मंच पाठकों, छात्रों और शोधकर्ताओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
NDLI भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से संचालित एक क्रांतिकारी पहल है जिसका उद्देश्य शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाना है। वर्ष 2015 में शुरू हुई यह परियोजना आज NDLI 3.0 के रूप में और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बन चुकी है। इसके विशाल डिजिटल भंडार में 13 करोड़ से अधिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हैं, जिनमें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, शोध, प्रतियोगी परीक्षाएँ, करियर विकास, पेटेंट, कानून, समाचार पत्र अभिलेख और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी सामग्री शामिल है।
मेले में आए पाठक NDLI के स्टॉल पर यह जानकर आश्चर्यचकित हैं कि अब लाइब्रेरी किसी इमारत तक सीमित नहीं, बल्कि मोबाइल और कंप्यूटर के ज रिए एक क्लिक पर उपलब्ध है। NDLI न केवल छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है बल्कि आम पाठकों को भी ज्ञान की व्यापक दुनिया से जोड़ता है। इसकी बहुभाषी खोज सुविधा और निःशुल्क पंजीकरण व्यवस्था इसे और भी विशेष बनाती है।
डिजिटल युग में शिक्षा और ज्ञान के प्रसार का यह मॉडल पुस्तक मेले में भविष्य की झलक प्रस्तुत कर रहा है। NDLI का यह स्टॉल साबित करता है कि किताबों के बीच डिजिटल लाइब्रेरी भी आज उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है- एक ऐसा प्रकाश, जो सीखने की राह को नई दिशा दिखा रहा है।