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1872 से 2011 तक की जनगणना पुस्तकों की प्रदर्शनी, आम जनता के लिए विशेष स्टॉल

कोलकाता पुस्तक मेले में भारतीय जनगणना का स्टॉल, 2027 की तैयारी की जानकारी।

By रजनीश प्रसाद

Jan 29, 2026 00:37 IST

कोलकाता : कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में हर वर्ष की तरह इस बार भी भारतीय जनगणना से जुड़ा विशेष स्टॉल दर्शकों के लिए लगाया गया है। यह स्टॉल जनगणना निदेशालय, पश्चिम बंगाल की ओर से स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य आम लोगों को जनगणना के महत्व, उसके लाभ और पूरी प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना है। यह पहल ‘डोर टू डोर यूनिट सेक्शन’ के तहत सरकार के वार्षिक जन-जागरूकता कार्यक्रम का हिस्सा है।

स्टॉल पर पिछले 10 से 12 वर्षों में जनगणना से जुड़े शोध कार्यों, रिपोर्टों और आंकड़ों पर आधारित कई महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। वर्ष 2011 की जनगणना पर आधारित तीन से चार प्रमुख प्रकाशन भी यहां देखे जा सकते हैं। इसके अलावा वर्ष 2001 से पहले की जनगणनाओं से संबंधित सामग्री तथा 1872 से लेकर 2001 तक की ऐतिहासिक जनगणना पुस्तकों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया है। ये सभी पुस्तकें केवल अध्ययन और संदर्भ के लिए रखी गई हैं, इनकी बिक्री नहीं की जा रही है।

स्टॉल में ‘भाषा विभाग’ और ‘जनसंख्या क्या कहती है’ जैसे विषयों से जुड़ी पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया गया है, ताकि पुस्तक मेले में आने वाले पाठक और आम नागरिक जनगणना के विभिन्न सामाजिक और सांख्यिकीय पहलुओं को बेहतर ढंग से समझ सकें। यहां मौजूद अधिकारी जनगणना की प्रक्रिया, पूछे जाने वाले प्रश्नों और इसके उपयोग को सरल भाषा में समझा रहे हैं।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारत में अगली जनगणना वर्ष 2027 में कराई जाएगी। इसकी प्रक्रिया फरवरी 2027 से शुरू होगी। इससे पहले पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मकानों की सूचीकरण और मकान जनगणना का कार्य पूरा किया जाएगा। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी। बर्फीले क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।

जनगणना 2027 में कई नई तकनीकी विशेषताओं को शामिल किया जाएगा, जिनमें डिजिटल डेटा संग्रह, स्व-गणना पोर्टल, भू-संदर्भित डिजिटल मानचित्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग और जाति आधारित गणना शामिल हैं। इसके साथ ही डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार को नीति निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास, आपदा प्रबंधन और शोध कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करते हैं। इसी उद्देश्य से कोलकाता पुस्तक मेले में लगाया गया यह स्टॉल आम जनता को जागरूक करने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

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रिकॉर्ड 32 लाख पाठकों संख्या के साथ संपन्न हुआ कोलकाता पुस्तक मेला

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