पोर्ट लुई: भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों को और मजबूत करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने घोषणा की कि भारत जल्द ही मॉरीशस में रक्षा अताशे की नियुक्ति करेगा। उन्होंने बताया कि यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूती देगा। यह जानकारी उन्होंने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ परियोजनाओं के शुभारंभ और समझौतों के आदान-प्रदान के दौरान दी।
ऊर्जा सहयोग पर बड़ा समझौता अंतिम चरण में
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत और मॉरीशस के बीच तेल और गैस आपूर्ति को लेकर सरकारी स्तर पर समझौता अंतिम चरण में है। यह समझौता मॉरीशस की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रक्षा और समुद्री सहयोग का विस्तार
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है। संयुक्त हाइड्रोग्राफी सेवा के तहत तैयार नौटिकल चार्ट्स की बिक्री से मॉरीशस को आय हो रही है, जो आपसी विश्वास और सहयोग का उदाहरण है। रक्षा अताशे की तैनाती से इस सहयोग को और गति मिलेगी।
विकास परियोजनाओं में भारत का योगदान
भारत द्वारा मॉरीशस, रोड्रिग्स और अगालेगा में 100 सामुदायिक विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें से 11 परियोजनाओं का उद्घाटन इस दौरे के दौरान किया गया। साथ ही 500 मिलियन मॉरीशियन रुपये की लागत से दूसरे चरण की योजना भी शुरू की जाएगी, जिससे जमीनी स्तर पर विकास को और बढ़ावा मिलेगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग
भारत ने मॉरीशस के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी योगदान दिया है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना शामिल है। इसके अलावा आयुष केंद्र उत्कृष्टता पर भी काम चल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भारत के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और मॉरीशस के उच्च शिक्षा आयोग के बीच समझौता हुआ है, जिससे अकादमिक सहयोग बढ़ेगा।
हरित ऊर्जा और डिजिटल पहल
दोनों देश सौर ऊर्जा और सतत परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति शामिल है। साथ ही मॉरीशस पहला देश बनेगा जहां सरकारी अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए iGOT कर्मयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया जाएगा।
भारत के सहयोग पर मॉरीशस का आभार
मॉरीशस के प्रधानमंत्री रामगुलाम ने भारत के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत हमेशा उनके साथ खड़ा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भारत का सहयोग उनके लिए उम्मीद की किरण है और दोनों देश मानते हैं कि मौजूदा संकट का समाधान कूटनीतिक रास्तों से ही संभव है।
व्यापक साझेदारी और भविष्य की दिशा
दोनों देशों के बीच संबंधों को 2025 में 'एन्हांस्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया गया था। जयशंकर ने कहा कि यह साझेदारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंधों पर आधारित है और भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति तथा ग्लोबल साउथ के साथ जुड़ाव को भी दर्शाती है।