बेंगलुरु : कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है लेकिन इस बिल को तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिख रही है।
प्रियंक खड़गे ने पूछा कि आखिर इस बिल का ड्राफ्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी आम लोगों और खासकर महिलाओं को इसके बारे में जानकारी नहीं है। उनका सवाल था कि क्या इस बिल को पास करने से पहले संबंधित पक्षों से कोई चर्चा की गई थी।
उन्होंने जनगणना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर भी चिंता जताई। खड़गे के अनुसार 2020 में होने वाली जनगणना अब तक नहीं कराई गई है और अब 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने की बात की जा रही है जो उचित नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इतने महत्वपूर्ण बदलाव के लिए व्यापक चर्चा और पारदर्शिता जरूरी है ताकि सभी वर्गों को न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व मिल सके।
यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा होने की संभावना है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने भी बिल को लेकर स्पष्टता की मांग की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अभी तक बिल का मसौदा नहीं दिखाया गया है और इसके प्रभावों को समझना जरूरी है।
प्रस्तावित बिल में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 816 करने और उनमें से लगभग एक-तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात कही जा रही है।
कुल मिलाकर महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विपक्ष पारदर्शिता व व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है।