चेन्नई/मुंबई: भारतीय क्रिकेट के वरिष्ठ और पूर्व टेस्ट खिलाड़ी सी. डी. गोपीनाथ का 96 वर्ष की उम्र में चेन्नई में निधन हो गया, जिससे क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वह भारत की पहली टेस्ट जीत दर्ज करने वाली ऐतिहासिक टीम के आखिरी जीवित सदस्य थे और शुरुआती दौर में भारतीय क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही।
रिकॉर्ड और ऐतिहासिक पहचान
गोपीनाथ न सिर्फ भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर थे, बल्कि दुनिया के वरिष्ठ खिलाड़ियों में भी शामिल थे, जिनसे अधिक उम्र केवल ऑस्ट्रेलिया के नील हार्वी की थी। उनके निधन के बाद अब 95 वर्षीय चंद्रकांत पाटणकर भारत के सबसे उम्रदराज जीवित टेस्ट क्रिकेटर बन गए हैं।
करियर और उपलब्धियां
1 मार्च 1930 को चेन्नई में जन्मे गोपीनाथ ने 1951 में इंग्लैंड के खिलाफ ब्रेबोर्न स्टेडियम में टेस्ट डेब्यू किया और अपने पहले मैच में नाबाद 50 व 42 रन बनाकर प्रभाव छोड़ा। उन्होंने 1960 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ईडन गार्डन्स में अपना अंतिम टेस्ट खेला। कुल 8 टेस्ट मैचों की 12 पारियों में उन्होंने 242 रन बनाए, जिसमें एक अर्धशतक शामिल रहा। उनके करियर का सबसे यादगार क्षण 1952 में मद्रास (अब चेन्नई) में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की पहली टेस्ट जीत थी, जिसमें टीम ने पारी और 8 रन से जीत दर्ज की और गोपीनाथ ने उस मैच में 35 रन बनाए।
घरेलू क्रिकेट में योगदान
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 83 मैचों की 119 पारियों में 4259 रन बनाए, जिसमें 9 शतक और 23 अर्धशतक शामिल हैं, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 234 रन रहा। उन्होंने मद्रास टीम की कप्तानी की और 1954-55 के रणजी ट्रॉफी फाइनल में शतक लगाकर टीम को पहला खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्रिकेट से जुड़ाव और बाद की भूमिका
खिलाड़ी जीवन के बाद भी गोपीनाथ क्रिकेट से जुड़े रहे। उन्होंने राष्ट्रीय चयनकर्ता, चयन समिति के अध्यक्ष और 1979 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के मैनेजर के रूप में सेवाएं दीं। अपने शांत स्वभाव और गहरी समझ के कारण वह खिलाड़ियों और प्रशासकों के बीच बेहद सम्मानित रहे।
श्रद्धांजलि और प्रतिक्रियाएं
तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (TNCA) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मनहास ने कहा कि गोपीनाथ उस दौर का प्रतिनिधित्व करते थे जब भारतीय क्रिकेट अपनी नींव मजबूत कर रहा था, जबकि मानद सचिव देवजीत सैकिया ने उन्हें भारतीय क्रिकेट को आकार देने वाली पीढ़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। बोर्ड ने उनके परिवार और करीबियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके योगदान को भारतीय क्रिकेट इतिहास का अमूल्य अध्याय बताया।