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मजबूत इरादों की मिसाल : चारों अंग खोकर भी नहीं हारी पायल नाग, बनी पैरा तीरंदाजी की विश्व चैम्पियन

बैंकॉक में आयोजित स्पर्धा में विश्व की नंबर 1 तीरंदाज शीतल देवी को पायल नाग ने हराकर अपना स्वर्ण पदक जीत लिया है।

By Moumita Bhattacharya

Apr 08, 2026 17:17 IST

फिल्म 'शोले' का ठाकुर याद है, जिसके दोनों हाथ नहीं थे। फिल्म के एक दृश्य में जब उनकी चादर गिर जाती है तो वह बेबसी से अपनी बहू (जया भादुड़ी) की तरफ देखते हैं। उस समय ठाकुर को देखकर भले ही आपको तरस आ रहा हो। लेकिन आज हम हमारे देश की एक ऐसी बेटी के बारे में बात कर रहे हैं जिसने कुछ ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसके बारे में जानकर आपका सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा।

हम बात कर रहे हैं पायल नाग (Payal Nag) की, जिसने दुनिया भर में अपनी खास पहचान स्थापित की है। पायल इस समय दुनिया की नंबर 1 क्वॉरड्रपल पैरा तीरंदाज बन चुकी हैं।

आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें, क्वॉरड्रपल पैरा तीरंदाज पायल नाग ने एक दर्दनाक हादसे में अपने दोनों हाथ और पैर गंवा दिए थे। हाल ही में बैंकॉक में आयोजित महिला कंपाउंड स्पर्धा के फाइनल में विश्व की नंबर 1 तीरंदाज शीतल देवी को पायल ने 139–136 से हराकर अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीत लिया है।

महज 8 साल की उम्र में हुई थी हादसे का शिकार

पायल नाग का जन्म ओडिशा के बालांगीर में एक प्रवासी मजदूर के घर हुआ था। News18 की मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जब पायल मात्र 8 साल की थी तब अनजाने में एक दिन उसके छोटे भाई ने घर की छत से एक कपड़ा बिजली के तार पर फेंक दिया और उसे लाने के लिए कहा।

उस तार से होकर उस समय 11,000 वोल्ट की बिजली प्रवाहित हो रही थी। इस बात से अंजान पायल लोहे के एक रॉड से कपड़ा उतारने की कोशिश करने लगी और तेज करंट की चपेट में आ गयी। हालांकि इस हादसे ने पायल नाग की जिन्दगी पूरी तरह से बदल कर रख दी लेकिन उसने हार नहीं मानी।

जम्मू में शुरू हुआ तीरंदाजी का सफर

हादसे ने भले ही पायल की जिंदगी बदल दी हो लेकिन इस जुझारू लड़की ने हार मानना नहीं सीखा। हादसे के बाद पायल नाग के माता-पिता बिजय और जनता को बालांगीर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने उनके गृह जिला में स्थित एक अनाथालय पार्बती गिरी बाल निकेतन में भेजने की सलाह दी थी।

जहां पायल ने अपने मुंह से पेंटिंग्स बनाना शुरू किया और इसे सोशल मीडिया पर शेयर करती थी। साल 2022 में कोच कुलदीप वेदवान की नजर उसपर पड़ी। वह पायल नाग को जम्मू के माता वैष्णो देवी आर्चरी अकादमी लेकर गए जहां उसका तीरंदाजी का प्रशिक्षण शुरू हुआ। उन्होंने पायल के लिए एक खास धनुष बनवाया जिसे उन्होंने शीतल देवी को भी इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।


अपने प्रोस्थेटिक पैरों से वह धनुष को पकड़ती और मुंह से तीर को छोड़ती हैं। इस काम में तीर को धनुष पर चढ़ाने के लिए पायल नाग को किसी की मदद की जरूरत पड़ती है। पायल ने अपनी कमियों को कभी भी अपनी कमजोरी नहीं बनने दी और उन्होंने एक ऐसी तकनीक विकसित की जो अनोखी तो है ही, साथ ही बहुत प्रभावशाली भी है।

एक-दूसरे के प्रति जबरदस्त प्रतिस्पर्धी मानसिकता

बैंकॉक में विश्व तीरंदाजी पैरा श्रृंखला (World Archery Para Series) 2026 के कंपाउंड स्पर्धा में शीतल देवी को हराने के बाद TOI से बात करते हुए पायल नाग ने कहा कि खेल के मैदान से बाहर मैं और शीतल एक-दूसरे के दोस्त ही होते हैं। लेकिन एक बार हमने अपना लक्ष्य साध लिया और जब हम एक-दूसरे के खिलाफ तीरंदाजी के मैदान में उतरते हैं तब जबरदस्त प्रतिस्पर्धी मानसिकता के साथ उतरते हैं।

उपलब्धियां ऐसी की दांतों तले दबा लें उंगली

पायल नाग की उपलब्धियों की सूची छोटी नहीं है। उनकी उपलब्धियां ऐसी हैं जिन्हें देखकर कोई आम इंसान भी आश्चर्य से दांतों तले अपनी उंगली दबा लेगा। महज 18 साल की उम्र में पायल नाग ने जनवरी 2025 में पैरालम्पिक नेशनल्स में शीतल देवी को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। इस साल के शुरुआत में आयोजित हुई खेलो इंडिया पैरा गेम्स में भी सिल्वर और नेशनल चैम्पियनशिप में पायल ब्रोंज मेडल जीत चुकी हैं।

खास बात है कि थाईलैंड में आयोजित इस प्रतियोगिता में पायल नाग ने शीतल देवी के साथ टीम इवेंट में साझेदारी भी की और दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार कौशल का प्रदर्शन करते हुए गत शुक्रवार को स्वर्ण पदक भी जीता है। पायल नाग की यह जीत निश्चित रूप से भारतीय पैरा खेलों, हिम्मत, जुझारूपन, नई सोच और मजबूत इरादों को ही दर्शाता है।

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