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EC vs TMC: बंगाल चुनाव से पहले बयानबाजी तेज, आयोग और टीएमसी के बीच सीधी जंग

27 लाख वोटरों के मुद्दे पर तकरार, चुनाव आयोग की ‘भयमुक्त और निष्पक्ष वोट’ की बात, टीएमसी ने उठाया ‘राजनीतिक पक्षपात’ का सवाल।

By श्वेता सिंह

Apr 08, 2026 16:04 IST

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। इस बार टकराव सीधे तौर पर चुनाव आयोग (Election Commission of India) और तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) के बीच खुलकर सामने आया है। बुधवार सुबह टीएमसी का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचा। इस टीम में डेरेक ओ ब्रायन, सागरिका घोष और साकेत गोखले शामिल थे। उनका उद्देश्य मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 27 लाख वोटरों के भविष्य को लेकर सवाल उठाना था।

हालांकि, मुलाकात के बाद टीएमसी नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए। डेरिक ओ’ब्रायन ने दावा किया कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) ने कथित रूप से उन्हें “गेट लॉस्ट” कहकर बाहर जाने को कहा।

आयोग की सख्त चेतावनी

इस विवाद के तुरंत बाद चुनाव आयोग की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कड़ा संदेश जारी किया गया। पोस्ट में सीधे तृणमूल कांग्रेस का नाम लेते हुए कहा गया कि पश्चिम बंगाल में होने वाला चुनाव “भयमुक्त, हिंसामुक्त, धमकीमुक्त, प्रलोभनमुक्त और पूरी तरह निष्पक्ष” होगा।



टीएमसी का पलटवार

आयोग के इस बयान का जवाब देते हुए टीएमसी ने भी X पर पोस्ट किया। पार्टी ने कहा कि चुनाव “दिल्ली के नियंत्रण से मुक्त, राजनीतिक पक्षपात से दूर और किसी को निशाना बनाने की प्रवृत्ति से मुक्त” होना चाहिए।



पहले से जारी है टकराव

यह पहली बार नहीं है जब दोनों पक्ष आमने-सामने आए हैं। राज्य में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) शुरू होने के बाद से तृणमूल कांग्रेस लगातार आयोग पर सवाल उठाती रही है। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है।

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि आयोग भाजपा के इशारों पर काम कर रहा है। वहीं, चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन में कई बदलाव किए हैं, जिन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

यहां तक कि टीएमसी नेताओं ने आयोग को “निर्वाचन आयोग” के बजाय “निर्यातन आयोग” और मुख्य चुनाव आयुक्त को “वैनिश कुमार” जैसे तीखे शब्दों से भी संबोधित किया है। एक संवैधानिक संस्था द्वारा किसी राजनीतिक दल को सीधे चेतावनी देना और उसके जवाब में तीखा राजनीतिक हमला-इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति और ज्यादा गरमाने वाली है।

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