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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कानून 2026 लागू: भर्ती, सेवा शर्तों और नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े बदलाव

IG से DG स्तर तक प्रतिनियुक्ति के नियम तय, विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए उठाए सवाल

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 09, 2026 23:20 IST

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी, जिसके बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है। मंजूरी के तुरंत बाद कानून एवं न्याय मंत्रालय ने इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया, जिससे यह औपचारिक रूप से लागू हो गया और देशभर में इसकी जानकारी साझा की गई।

यह नया कानून केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में कार्यरत अधिकारियों और कर्मियों के लिए एक स्पष्ट और संगठित प्रशासनिक ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से लाया गया है। इसके तहत ग्रुप ‘ए’ जनरल ड्यूटी अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया, सेवा शर्तें, पदोन्नति, जिम्मेदारियां और अन्य प्रशासनिक नियमों को व्यवस्थित किया गया है। साथ ही इसमें बलों के संचालन, प्रबंधन और उनसे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया गया है ताकि कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।

सरकार के अनुसार, CAPFs देश की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन बलों का कार्य वातावरण और जिम्मेदारियां अन्य सरकारी संगठनों से अलग होती हैं, इसलिए इनके लिए अलग और विशेष नियमों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

इस कानून के जरिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने की कोशिश की गई है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और बलों की कार्यक्षमता में सुधार होगा। इसके अलावा यह कानून यह भी सुनिश्चित करता है कि विभिन्न स्तरों पर पदों की नियुक्ति एक तय व्यवस्था के तहत हो। उदाहरण के तौर पर इंस्पेक्टर जनरल (IG) स्तर तक के 50 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरे जाएंगे, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्तर पर कम से कम 67 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाने का प्रावधान है। वहीं, विशेष महानिदेशक (SDG) और महानिदेशक (DG) के सभी पद पूरी तरह प्रतिनियुक्ति के आधार पर ही भरे जाएंगे।

गौरतलब है कि यह विधेयक पहले राज्यसभा में पारित हो चुका है लेकिन उस दौरान विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए वॉकआउट किया था। विपक्ष का तर्क था कि यह प्रावधान 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस निर्देश के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि CAPFs में प्रतिनियुक्ति वाले पदों को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए।

अब इस विधेयक को लोकसभा में भी पेश किए जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे पर होने के कारण गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय इसे सदन में पेश कर सकते हैं। इस कानून के लागू होने से उम्मीद की जा रही है कि CAPFs की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।

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