मिदनापुर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से राहुल सांकृत्यायन की जयंती के अवसर पर “राहुल सांकृत्यायन: सृजन और चिंतन” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उनके साहित्य व विचारों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रेणु गुप्ता के स्वागत गीत से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राहुल सांकृत्यायन का साहित्य शोधपरक है और उनकी यात्राएं उन्हें विभिन्न संस्कृतियों से जोड़ती हैं। इसके बाद विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि वर्तमान समय में देश धार्मिक उन्माद, राजनीतिक विषाद और जातिवाद जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे दौर में राहुल सांकृत्यायन का सृजन और चिंतन इन संकटों का समाधान प्रस्तुत करता है।
शोधार्थी मदन साह ने प्रोफेसर दामोदर मिश्र का संदेश पढ़कर सुनाया जिसमें बताया गया कि राहुल सांकृत्यायन का साहित्य आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक शोषण के खिलाफ एक सशक्त हस्तक्षेप है। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संजय जायसवाल ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि राहुल सांकृत्यायन ने परंपरा को बुद्धिवाद से जोड़कर देखा। उन्होंने पुराने प्रतीकों को छोड़कर नए दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उनके अनुसार राहुल केवल पर्यटक नहीं बल्कि सच्चे अर्थों में यात्री थे जिनकी दृष्टि मनोरंजन तक सीमित न होकर व्यापक विश्वदृष्टि से जुड़ी थी। उनका साहित्य धार्मिक संकीर्णता और सामाजिक असमानता के विरुद्ध एक मजबूत प्रतिरोध प्रस्तुत करता है। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन को बहुज्ञता, अन्वेषणशीलता और तर्कशीलता का त्रिभुज बताया।
इस अवसर पर विभाग की शोधार्थी गायत्री बाल्मीकि ने ‘स्त्री घुमक्कड़’ निबंध की चर्चा करते हुए महिलाओं के लिए यात्रा के महत्व को रेखांकित किया। टीना परवीन ने उनके धार्मिक और साम्प्रदायिक विचारों पर प्रकाश डाला। वहीं मिथुन नोनिया ने उनकी राजनीतिक दृष्टि को समझाते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य को भावुकता से निकालकर संघर्ष और यथार्थ से जोड़ा।
कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने किया। उन्होंने कहा कि राहुल सांकृत्यायन का साहित्य आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है और उनकी यात्राएं तथा अनुभव हमें दुनिया को समझने की नई दृष्टि देते हैं। अंत में उष्मिता गौड़ ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में अनुराधा कुमारी, निसार अहमद, नसरीन बानो, रिया श्रीवास्तव, दुर्गा चौधरी, खुशी प्रसाद, प्रीति ठाकुर, अर्जुन शरकी, नगमा परवीन, रोशनी खातून, प्रिया मिश्रा, शबाना खातून, उषा दुबे, पिन्शु ठाकुर, सानिया परवीन, प्रियांशु ठाकुर और मुस्कान परवीन सहित कई विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।