नयी दिल्लीः लोकसभा में सोमवार को एक बार फिर संसदीय बहस का माहौल गर्मा गया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवाने के अप्रकाशित संस्मरण से उद्धरण देने की कोशिश की।
इस कदम के तुरंत बाद हाउस में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। भाजपा के कई सांसदों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद को गुमराह कर रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विरोध जताया। इस विवाद के कारण लोकसभा की बैठक दो बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः हंगामे के बीच आज की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस घटनाक्रम पर कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया ओवररिएक्शन थी और इसके कारण संसद की कार्यवाही जाम हो गई। थरूर ने कहा कि राहुल गांधी जिस मुद्दे को उठाना चाहते थे, वह पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था, क्योंकि Caravan मैगजीन में प्रकाशित लेख उसी संस्मरण को उद्धृत करता है। उन्होंने कहा कि सरकार को विषय पर बहस की अनुमति देनी चाहिए थी। आखिरकार यह मुद्दा जनता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
थरूर ने नेहरूकालीन संसद का उदाहरण देते हुए कहा कि 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान भी सरकार खुली बहस को प्रोत्साहित करती थी। सरकारी सांसद भी खुलकर आलोचना कर सकते थे। उनका कहना था कि लोकतंत्र में संसद को खुली बहस और पारदर्शिता की जरूरत है।
थरूर ने सवाल उठाया कि आज की सरकार चीन जैसे गंभीर मुद्दों पर संसद में चर्चा से क्यों डरती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेश नीति और रक्षा मामलों पर खुली बहस लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे दबाया नहीं जाना चाहिए।
विपक्षी सांसदों ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया। उनका कहना था कि सरकार को हंगामा करने की बजाय मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देनी चाहिए ताकि संसद अपने कामकाज में सक्षम रहे और जनता को सही जानकारी मिल सके।