आनंदपुर के नजीराबाद में मृतकों के परिजनों के साथ DNA की मैचिंग होने के बाद ही देहांशों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। पिछले लगभग 1 माह से नजीराबाद के गोदाम में लगी आग में जिंदा जले मजदूरों के परिजन देहांशों का इंतजार कर रहे थे। आग को नियंत्रित करने के बाद पूरी तरह से जलकर नष्ट हो चुके गोदाम से कुल 27 देहांश बरामद हुए थे।
आग इतनी भयावह थी कि उसमें जलकर मर चुके लोगों को पहचानना नामुमकिन हो गया था। इसलिए परिजनों से DNA का सैम्पल लिया गया था।
सैम्पल के आधार पर 18 लोगों की पहचान हो सकी है। इन 18 लोगों के देहांशों को ही शनिवार को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को इस हादसे में जलकर मरे 18 लोगों के परिजनों को नरेंद्रपुर थाना में बुलाया गया था। वहां कुछ कानूनी कार्रवाई करने के बाद उन्हें कांटापुकुर मॉर्ग ले जाया गया।
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वहीं पर इन देहांशों को सुरक्षित रखा गया था जिन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। हालांकि जलकर मरे लोगों के देहांश में कुछ भी बचा हुआ नहीं है सिवाय कुछ अधजली हड्डियों के। परिजनों का कहना है कि जो बचा वहीं लेकर जाते हैं।
बताया जाता है कि अधिकांश परिवार ही पूर्व मिदनापुर से हैं। इनमें तमलुक, हल्दिया और नंदकुमार इलाके शामिल हैं। सुबह से थाना में पहुंच रहे हर व्यक्ति के चेहरे पर मातम पसरा हुआ था। किसी ने अपने बेटे को खोया तो किसी ने पति को, किसी का बड़ा भाई जिंदा जल गया तो किसी का चाचा। आंखें नम और चेहरा गमगीन। पिछले 1 महीने से चल रहा मानसिक तनाव और देहांशों को प्राप्त करने के लिए युद्ध एक तरह से समाप्त हुआ।
थाना के सामने खड़े तमलुक के देवादित्य दीन्दा के चाचा का कहना है कि देवादित्य का रिपोर्ट अभी तक नहीं आया है। बाकियों के साथ आया हूं। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर तरह से सहायता कर रहा है। नंदकुमार बरगोदा से सुजित सिंह के परिवार के सदस्य थाना पहुंचे थे। वहीं रामकृष्ण मंडल का शव लेने उनके पिता निरंजन मंडल पहुंचे हैं।
निरंजन मंडल का दावा है कि इस हादसे में उन्होंने अपने भाई गोविंद मंडल को भी खो दिया है। हालांकि अभी उनको शव नहीं सौंपा जा रहा है क्योंकि DNA की रिपोर्ट नहीं आयी है। निरंजन मंडल का कहना है कि अभी तक काफी लोगों का DNA रिपोर्ट नहीं आया है।