सुगबुगाहट पहले से थी ही, उसे सच साबित करते हुए शुक्रवार को मयना से प्रदेश भाजपा नेता चंदन मंडल ने तृणमूल का दामन थाम लिया। उन्होंने तृणमूल भवन में पार्टी का झंडा उठाकर सदस्यता स्वीकार की। राजनौतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल द्वारा विरोधी पार्टी में फूट डालना बहुत बड़ी उपलब्धि ही है।
पूर्व मिदनापुर को शुभेंदु अधिकारी की वजह से भाजपा के गढ़ के तौर पर ही माना जाता है। उसी जिले में भाजपा में फूड डाली गयी है। वहीं दूसरी ओर भाजपा का दावा है कि पार्टी किसी व्यक्ति के भरोसे नहीं चलती है। इस योगदान का तृणमूल को कोई फायदा नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि जिला स्तरीय राजनीति में चंदन मंडल को मयना से भाजपा विधायक अशोक दिन्दा का घोर विरोधी ही माना जाता है। साल 2021 में चुनाव के समय भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चंदन मंडल के नाम की काफी चर्चाएं हुई थी लेकिन आखिरकार पार्टी ने पूर्व क्रिकेटर अशोक दिन्दा को टिकट दिया था। वह चुनाव जीते भी थे।
इसके बाद ही मयना का राजनीतिक समीकरण भी बदल गया था। चंदन कुनबे का दावा है कि पार्टी ने उनका महत्व घटाया है क्योंकि उन्हें ब्लॉक कन्वेयर के पद से हटाया गया था। पिछले साल भाजपा के किसी भी प्रचार अभियान में चंदन मंडल नजर नहीं आए थे।
पार्टी बदलने के बाद चंदन मंडल का दावा है कि मुझे नहीं पता कि मैं कैसे भाजपा में नेता बन गया। पार्टी बदलते ही उन्होंने मयना के लोगों को मछली पालन में मदद, जलजमाव आदि से मुक्ति दिलाने का आश्वासन भी दिया। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान विधायक अशोक दिन्दा की आलोचना भी की।
दूसरी ओर उनके पार्टी बदलने को लेकर जिला भाजपा सभापति मलय सिन्हा का कहना है कि चंदन मंडल ने क्यों पार्टी बदली, इस बारे में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है। भाजपा किसी एक व्यक्ति पर आधारित पार्टी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जिले की 16 सीटों में सभी पर हमारा ही कब्जा होगा। अशोक दिन्दा की प्रतिक्रिया लेने के लिए उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
वहीं चंदन मंडल की पत्नी खुकुमनी मंडल, जो गोजिना पंचायत से भाजपा की प्रधान हैं, वह भी अब सवालों के घेरे में हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। लेकिन चंदन मंडल का दावा करना कि बाकचा और गोजिना, इन दोनों ग्राम पंचायत इलाके में लक्ष्मी भंडार का पिछले कई महीनों से रुपया नहीं मिला है और उन्होंने तृणमूल के उच्चस्तरीय नेताओं से इस बारे में बात की है, चर्चाओं में छाया हुआ है। उनका दावा है कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र भी लिखा है और मुख्यमंत्री ने आश्वस्त भी किया है कि जल्द ही सबको रुपया मिल जाएगा।
यह मामला वर्तमान में कलकत्ता हाई कोर्ट में विचाराधीन है। आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा समर्थक होने की वजह से वहां कई महिलाओं को लक्ष्मी भंडार के रुपए से वंचित किया जा रहा है।
हालांकि चंदन मंडल के इन आरोपों को सामने रखते हुए ही पार्टी की नेता चंद्रीमा भट्टाचार्य ने कहा कि लक्ष्मी भंडार से लेकर किसी भी सरकारी परियोजना में भाजपा या तृणमूल के नाम पर कोई बंटवारा नहीं होता है, यह पूरे बंगाल को पता है। हालांकि यह नहीं पता है कि इसके लाभार्थियों ने ठीक तरीके से फॉर्म भरा था या नहीं। संभवतः कोई तकनीकि समस्या आयी होगी।