वाम नेता प्रतीक उर रहमान को लेकर इतने दिनों से चल रही सभी चर्चाएं आखिरकार खत्म हुई। लोकसभा सांसद व तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को उन्हें तृणमूल कांग्रेस में शामिल करवा लिया। आमतला में पार्टी कार्यालय में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का झंडा थाम लिया।
गत रविवार को माकपा की राज्य कमेटी, जिला कमेटी और प्राथमिक सदस्य के पद से उन्होंने इस्तीफा देते हुए पत्र लिखा था। इस पत्र के सामने आने के बाद से ही विवादों का दौर शुरू हो गया था। पिछले 4 दिनों से उनके नाम को लेकर राजनैतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही थी। यहां तक की सीपीएम के राज्य कमेटी की बैठक में भी प्रतीक उर रहमान उपस्थित नहीं हुए थे। शुक्रवार को सीपीएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सलीम ने पुष्टि करते हुए कह दिया था कि उनका पदत्याग स्वीकार कर लिया गया है।
इसके बाद प्रतीकुर रहमान ने भी संकेत दिया था कि वह शनिवार को किसी नयी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। आखिरकार अभिषेक बनर्जी के माध्यम से उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर केंद्र से प्रतीक उर रहमान अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे। वह इस लोकसभा केंद्र में तीसरे स्थान पर रहे थे। बीच के दो सालों में काफी कुछ बदल गया। प्रतीक का आरोप है कि इसके बाद से ही माकपा में लगातार उन्हें नजरंदाज किया जा रहा है।
हाल ही में सीपीएम की राज्यस्तरीय कार्यक्रम 'बंगाल बचाओ यात्रा' (बांग्ला बचाओ यात्रा) में भी वह नजर नहीं आए थे। इस सप्ताह ही प्रतीक उर रहमान ने मीडिया में आरोप लगाते हुए कहा था कि पार्टी में उन्हें साइडलाइन करने के साथ-साथ उनपर लगातार व्यक्तिगत आक्रमण किया जा रहा है। इस वजह से सीपीएम से उन्होंने हटकर खड़े होने का फैसला लिया।
तृणमूल में शामिल होने के बाद प्रतीक उर रहमान ने कहा कि मुझे लगा कि इस समय भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए, भाजपा को रोकने के लिए जिस प्रकार पूरे देश के लोगों की आवाज दबाई जाती है, उनके खिलाफ लड़ाई के लिए सबसे बड़ी ताकत तृणमूल कांग्रेस ही है। इसी वजह से मैं अभिषेक बनर्जी के साथ आया हूं, ममता बनर्जी के साथ हूं।
तृणमूल में शामिल होकर प्रतीक उर रहमान ने क्या कहा? सुनिए यहां : -