चांदकुमार बड़ाल, कूचबिहार
दंत चिकित्सक की चार सालों की पढ़ाई पूरी कर बेटा डॉक्टर बनने के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में बतौर इंटर्न एक मेडिकल कॉलेज में काम भी कर रहा है। इसके बावजूद बेटे के लिए मां बेरोजगार भत्ता का फॉर्म लेने पहुंची। रविवार को कूचबिहार के रवींद्र भवन में यहीं नजारा दिखा।
फॉर्म लेकर उक्त महिला ने कहा कि बेटे की पढ़ाई तो लगभग खत्म हो गयी है लेकिन नौकरी मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी तो नहीं है। अगर सरकारी भत्ता मिलता है तो थोड़ी मदद हो जाएगी। इसी वजह से फॉर्म लेने आयी हूं।
राज्य बजट में 'बांग्लार युवा साथी' परियोजना की घोषणा तो की गयी थी लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में बताया कि युवा साथी परियोजना का भत्ता अप्रैल से दिया जाएगा। रविवार से परियोजना के लिए फॉर्म वितरित करने का काम शुरू हो गया। माध्यमिक उत्तीर्ण युवक-युवतियों को 1500 रुपए का प्रतिमाह भत्ता दिया जाएगा।
लेकिन वास्तविकता में रविवार को कुछ और ही नजारा देखने को मिला। युवा साथी फॉर्म वितरित होने की लाइन में बीएससी एग्रीकल्चर, अकाउंटेंसी में मास्टर्स युवक भी खड़े नजर आए। इन सबके साथ ही कूचबिहार के वार्ड नंबर 18 की निवासी भाष्वती दे भी फॉर्म लेने की लाइन में खड़ी थी।
उनका बेटा शुभ्रनील दे ने हल्दिया के बीसी राय मेडिकल कॉलेज से डेंटल कोर्स पूरा किया है। वर्तमान में वह वहीं पर इंटर्नशिप भी कर रहा है। उसकी मां बेटे का आधार कार्ड लेकर कूचबिहार के रवींद्र भवन में सुबह से लाइन में खड़ी हैं। पूछने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटे के लिए फॉर्म लेने आयी हूं। बेटा बीडीएस की पढ़ाई पूरी कर चुका है।
भविष्य भी उज्जवल है। फिर क्यों मां सिर्फ 1500 रुपयों की खातिर बेरोजगार भत्ता लेने की लाइन में खड़ी है? इस सवाल का जवाब देते हुए भाष्वती दे ने कहा कि हम जनरल श्रेणी से हैं। बेटे ने पढ़ाई तो पूरी कर ली है लेकिन नौकरी मिलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। जनरल श्रेणी का कोटा बहुत कम होता है। इसलिए बेटे के भविष्य और पढ़ाई के खर्च, आवाजाही में होने वाले खर्चों आदि के बारे में सोचकर ही बेरोजगार भत्ता का फॉर्म भरने आयी हूं। सरकारी परियोजना से बेटे को भी थोड़ी सुविधा मिल जाए, यहीं सोच रही हूं।