SIR की अंतिम मतदाता सूची (पहला चरण) जारी होने के बाद 60 लाख 6 हजार 675 वोटरों के नाम ‘विचाराधीन’ रखा गया है। इस सूची में कई काउंसिलर, विधायक और यहां तक कि वर्ल्ड कप विजेता खिलाड़ी का नाम भी शामिल हैं।
लेकिन इतने लाख नाम ‘विचाराधीन’ क्यों हैं? इसकी जिम्मेदारी किसकी है? चुनाव आयोग का कहना है कि इतने सारे मामलों का निपटारा संबंधित ERO/AERO ने नहीं किया है। चुनाव आयोग ने उक्त बातें विज्ञप्ति जारी कर कही है। चुनाव आयोग की विज्ञप्ति जारी होने के बाद ही राज्य के WBCS अधिकारियों के एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया कि यह जिम्मेदारी ERO/AERO की नहीं बल्कि आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों (Observers) की है।
WBCS अधिकारियों की इस प्रतिक्रिया के बाद आयोग ने सोमवार रात को एक पोस्ट जारी कर साफ किया कि आयोग ने यह कभी नहीं कहा कि सभी ‘Under Adjudicated’ मामले ERO/AERO की वजह से नहीं निपटाए गए हैं। आयोग ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को 'लक्ष्मण रेखा' पार नहीं करनी चाहिए।
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CEO West Bengal (@CEOWestBengal) March 1, 2026
कुल मिलाकर राज्य भर में लगभग 60 लाख नाम ‘विचाराधीन’ रहने की वजह से विवाद शुरू हो गया है। अब सवाल तो यह भी उठने लगे हैं कि क्या चुनाव से पहले इतने वोटरों के दस्तावेजों की जांच का काम ज्यूडिशियल अधिकारी समय रहते पूरा कर पाएंगे?
चुनाव आयोग ने इस पर बयान जारी कर कहा है, 'जानकारी देना जरूरी है कि कुछ नामों को ‘अंडर एडज्यूडिकेटेड’ किया गया है, क्योंकि संबंधित ERO/AERO ने इन मामलों का निपटारा नहीं किया। इसलिए ये नाम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों के पास निपटारे के लिए भेजे गए हैं।'
चुनाव आयोग के बयान का विरोध करते हुए राज्य के WBCS अधिकारियों के संगठन ने फिर से बयान जारी किया है। उनका कहना है कि ERO/AERO ने वोटरों को ‘Under Adjudicated’ नहीं किया है और आयोग का यह दावा पूरी तरह गलत है। इस संगठन ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
उक्त संगठन ने अपने बयान में कहा गया है कि पूरे SIR की प्रक्रिया में ERO/AERO ने कड़ी मेहनत करके सभी काम किए हैं। उन्होंने सुनवाई, दस्तावेज अपलोडिंग समेत सभी कार्य संभाले। संगठन का आरोप है कि आयोग के नियुक्त पर्यवेक्षक (Observers) और माइक्रो Observers ने बिना किसी उचित निगरानी या राय के कई मामलों को रद्द कर दिया। इसी वजह से ‘Under Adjudicated’ सूची में इतने ज्यादा नाम शामिल हुए। संगठन का कहना है कि आयोग की इस तरह की शिकायतें ERO/AERO के लिए अपमानजनक हैं और उनका मनोबल तोड़ रहा है।
With response to the communication in the social media by @CEOWestBengal dt. 02.03.2026, it is noted with grave concern that the names marked as "Under Adjudication" has been attributed to the EROs/AEROs. This is completely untrue and emphatically denied. It has been alleged in
WBCSEOA SEC (@wbcseoa) March 2, 2026
इसके जवाब में सोमवार को आयोग ने कहा कि सभी मामलों का निपटारा ERO/AERO की वजह से नहीं रुका। आयोग ने स्पष्ट किया कि अपने काम में नियुक्त सरकारी कर्मचारियों के बारे में बयान देने या उन्हें दोषी ठहराने का अधिकार किसी को नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ इस तरह की शिकायतें करना बिल्कुल उचित नहीं है।