सुनवाई में किसी करीबी रिश्तेदार को जाने दिया जाए या फिर सुनवाई की प्रक्रिया को वर्चुअली करने का इंतजाम किया जाए। यह अनुरोध पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं ने किया था जो भारत के किसी और हिस्से में नहीं बल्कि विदेशों में रहते हैं तथा उन्हें SIR की सुनवाई के लिए बुलाया गया है। चुनाव आयोग ने उनके आवेदन का जवाब दिया है और इस बाबत एक बड़ा फैसला भी लिया है।
गुरुवार को चुनाव आयोग ने एक विज्ञप्ति जारी की जिसमें बताया गया जिन प्रवासी मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया है, उनके करीबी रिश्तेदार सभी दस्तावेज लेकर आ सकते हैं। हालांकि इस विज्ञप्ति में दूसरे राज्यों में रहने वाले मतदाताओं के संबंध में किसी छूट के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
खास बात यह है कि यह नोटिस उस समय जारी हुई है जब विदेश में रहने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को सुनवाई के लिए नोटिस भेजने को लेकर देशभर में बहस हो रही है।
मतदाता सूची का मसौदा जारी होने के बाद 'लॉजिकल गड़बड़ियों' की वजह से मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। लेकिन राज्य के जो मतदाता उच्च शिक्षा अथवा काम के सिलसिले में विदेशों में हैं, उन्हें समय पर सुनवाई में शामिल होने में बहुत मुश्किलें आ रही हैं। यह भी डर है कि अगर वे समय पर सुनवाई में शामिल नहीं हुए तो कहीं उनका नाम मतदाता सूची से ना हटा दिया जाए।
6 जनवरी को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने इस मामले में चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। इस समस्या का समाधान करते हुए चुनाव आयोग ने गुरुवार को कहा कि जो प्रवासी मतदाता उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं उनके अनुमोदित करीबी रिश्तेदार सुनवाई के लिए आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में करीबी रिश्तेदार के साथ मतदाता के रिश्ते का सबूत लाना होगा। इसके साथ ही करीबी रिश्तेदार वोटर सुनवाई के लिए आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेज भी ला सकते हैं।