कोलकाता : पश्चिम बंगाल में पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच के लिए नई भारतीय जनता पार्टी सरकार ने एक विशेष आयोग का गठन किया है। नई सरकार के मंत्रियों के विभागों का कार्यभार संभालने के बाद एक के बाद एक कई कथित वित्तीय गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं। अब परिवहन विभाग की जेटी निर्माण परियोजना में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला चर्चा में है।
राज्य के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया है कि जिन जेटियों के निर्माण पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च होने थे, उनके लिए सरकारी रिकॉर्ड में करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये का खर्च दर्शाया गया है। उन्होंने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए संबंधित ठेकेदार कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह का दावा है कि इस कथित भ्रष्टाचार का नेटवर्क काफी व्यापक और गहरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता हो सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कथित भ्रष्टाचार में "डायमंड हार्बर सिंडिकेट" की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री के अनुसार विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से संचालित इस परियोजना के अंतर्गत डायमंड हार्बर क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों पर जेटियों का निर्माण किया गया था। उनका दावा है कि राज्य के अन्य क्षेत्रों में जिन ठेकेदारों ने जेटियों का निर्माण किया, उनका संबंध भी डायमंड हार्बर क्षेत्र से था।
अर्जुन सिंह ने कहा, "मैंने विभाग से यह जानकारी मांगी है कि राज्य में कुल कितनी जेटियां बनाई गईं और इस परियोजना में सरकार का कितना पैसा खर्च हुआ। सोमवार तक मुझे पूरी रिपोर्ट मिल जाएगी। उसके बाद संबंधित ठेकेदार कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इस संबंध में आवश्यक निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए हैं।"
परिवहन मंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर ग्रामीण और नदी किनारे स्थित क्षेत्रों में यात्रियों की सुविधा के लिए जेटी निर्माण की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना को विश्व बैंक की वित्तीय सहायता प्राप्त थी।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार प्रत्येक जेटी के निर्माण पर लगभग 20 लाख रुपये का खर्च निर्धारित किया गया था। लेकिन जांच के दौरान यह सामने आया कि कई मामलों में एक जेटी के लिए लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक का बिल प्रस्तुत किया गया। मंत्री का आरोप है कि इस तरह प्रत्येक जेटी पर लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि कई जेटियों के निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब थी। कुछ जेटियां निर्माण के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गईं या ढह गईं, जिससे परियोजना की गुणवत्ता और खर्च दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अर्जुन सिंह का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट है कि सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने इस मामले को "हिमशैल का केवल ऊपरी हिस्सा" बताते हुए कहा कि विभाग में वित्तीय अनियमितताओं का दायरा इससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।
परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया जानने के लिए पूर्व परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती से संपर्क करने की कोशिश की गई। हालांकि फोन कॉल का जवाब नहीं मिला। उन्हें भेजे गए संदेश का भी कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।
इस बीच परिवहन विभाग की जेटी परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर सोमवार को आने वाली रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।