अपने आसपास होने वाले अन्याय को लेकर अगर कोई व्यक्ति विरोध नहीं जताता है तो ऐसे व्यक्तियों को विवेकहीन माना जाता है। प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से अपने अनुभवों को जरूर व्यक्त करता है। कोई शब्दों में, कोई सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर और कोई कागज पर रंग बिखेरकर। इसी क्रम में हाल ही में तृणमूल सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी कलम उठायी और लिखा, 'मैं अस्वीकार करता हूं'।
SIR को लेकर पिछले कुछ समय से बंगाल में जो स्थिति है, उसके खिलाफ ही अभिषेक बनर्जी ने अपनी आवाज बुलंद की है। उनकी लिखी कविता 'मैं अस्वीकार करता हूं' के हर शब्द में आम जनता पर हो रहे अत्याचार का सजीव चित्रण किया गया है।
कविता की प्रत्येक पंक्ति में उन्होंने SIR की वजह से उत्पन्न हुई भयावह परिस्थिति और आम जनता को हो रही समस्याओं के बारे में लिखा गया है। इस कविता के माध्यम से अभिषेक बनर्जी ने SIR प्रक्रिया के दौरान आम मतदाताओं पर लादे गए नियमों और डर के माहौल को लेकर अपना विरोध जताया है। दावा किया जा रहा है कि अब तक SIR की प्रक्रिया में लगभग 150 लोगों की मौत हो चुकी है। अपनी कविता में अभिषेक बनर्जी ने लिखा है, "यह सिर्फ एक संख्या नहीं है बल्कि राष्ट्र में लगायी गयी आग में जल रहे लोगों की चीखें हैं।"
अपनी कविता 'मैं अस्वीकार करता हूं' में अभिषेक बनर्जी ने जिस तरीके से SIR की वजह से उत्पन्न परिस्थिति का विरोध किया है उससे यह स्पष्ट हो चुका है कि सड़क पर हो या कलम के माध्यम से हो, तृणमूल अपनी पूरी ताकत के साथ विरोध जताने के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR के विरोध में करीब 26 कविताएं लिख चुकी हैं। अब इस सूची में अभिषेक बनर्जी का नाम भी शामिल हो गया है।