SIR की सुनवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के तीखे सवालों का सामना चुनाव आयोग को करना पड़ा। नाम की स्पेलिंग से लेकर माता-पिता के साथ उम्र का फर्क ऐसे विषयों पर सुनवाई के लिए नोटिस भेजा जा रहा है जिसे सुनकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। सिर्फ इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को कुछ हद तक स्वीकार करते हुए माइक्रो ऑब्जर्वर को अंतिम अधिकार न देने का फैसला सुनाया है।
अब SIR को लेकर आखिरी फैसला EROs ही लेंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की समयसीमा को भी बढ़ा दिया है। इसका मतलब है कि अब 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी नहीं होगी।
सोमवार (9 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची व एन.वी. अंजरिया की खंडपीठ ने अपने आदेश में अंतिम मतदाता सूची को जारी करने की समयसीमा को बढ़ा दिया है। इस खंडपीठ ने राज्य सरकार के 8505 अधिकारियों को DEO के सामने 10 फरवरी को शाम 5 बजे से पहले हाजिर होने का आदेश दिया है। अगर उपयुक्त लगता है तो चुनाव आयोग इन अधिकारियों का इस्तेमाल ERO या AERO के तौर पर कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि 14 फरवरी के बाद एक सप्ताह का अतिरिक्त समय ERO को दिया जाएगा ताकि वे सभी दस्तावेजों की पूरी तरह से जांच करके आवश्यक फैसला ले सकें। अदालत का कहना है कि इसी वजह से अतिरिक्त समय दिया जा रहा है।
बता दें, पिछली सुनवाई में माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए थे। आयोग ने स्पष्ट किया था कि राज्य कर्मचारी नहीं देने की वजह से ही माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति की गयी है। उस दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी खुद सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित थी। उन्होंने बताया कि आवश्यक संख्या में कर्मचारी दिए जाएंगे।
वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री द्वारा अपनी दलील पेश करने के खिलाफ एक आवेदन किया गया था। इस आवेदन के जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसमें अस्वाभाविक तो कुछ भी नहीं है। यहीं तो संविधान के प्रति आस्था और विश्वास जताने का तरीका है। इस मामले का राजनैतिकरण न करें।