कोलकाता : “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष” विषय पर एक राजभाषा संगोष्ठी सह कार्यशाला का आयोजन नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), कोलकाता के तत्वावधान में भारतीय खाद्य निगम, क्षेत्रीय कार्यालय, कोलकाता द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर भारतीय खाद्य निगम की भूमिका, कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय महत्व पर संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत करते हुए संगोष्ठी की औपचारिक शुरुआत की गई।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए रीना पाण्डेय, प्रबंधक (राजभाषा) ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ है। वर्ष 1965 में स्थापित यह संस्था किसानों से उपज की खरीद से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक अनाज पहुंचाने का दायित्व निभाती है। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं, आकस्मिक संकटों अथवा आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश को खाद्यान्न संकट से बचाने के लिए बफर स्टॉक बनाए रखना भी इसकी अहम जिम्मेदारी है।
“हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता अमरेश कुमार, महाप्रबंधक (क्षेत्र), भारतीय खाद्य निगम, कोलकाता ने की। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए हिंदी पत्रकारिता के लोकतांत्रिक मूल्यों, जनसरोकारों और पाठकों की विवेकशील भूमिका पर विश्वास व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विचित्र सेनगुप्त, उप निदेशक (कार्यान्वयन), क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग उपस्थित रहे। उन्होंने पत्रकारिता को आमजन तक रोजमर्रा की सच्ची खबर पहुंचाने का माध्यम बताया और स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारों एवं अधिवक्ताओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए आजादी के 70 साल बाद भारतीय हवाई अड्डों और राजधानी ट्रेनों में हिंदी अखबारों की उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण बताया।
विशिष्ट वक्ता के रूप में जीतेन्द्र जितांशु, संस्थापक एवं संपादक ‘सदीनामा’ ने उदंत मार्तंड से लेकर राजा राममोहन राय द्वारा प्रकाशित बहुभाषी पत्रों तक हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने 1826 से 2026 तक के 200 वर्षों के संदर्भ में बंगाल के पुनर्जागरण, वर्तमान पत्रकारिता की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार रखे। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को ‘सदीनामा’ पत्रिका की प्रतियां स्मारिका स्वरूप प्रदान कीं।
विचित्र सेनगुप्त ने प्रश्नोत्तर सत्र में हिंदी पत्रकारिता में हिंग्लिश और अन्य भाषाओं के शब्दों के प्रयोग पर विचार रखते हुए भाषा की जीवंतता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में खुले मंच पर प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया जिसमें राजेश साव, प्रबंधक (राजभाषा), कोल इंडिया एवं सदस्य-सह-सचिव, नराकास ने प्रश्न पूछे। अंत में शांति नीलिमा कच्छप, सहायक महाप्रबंधक (हिंदी) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।