हुगलीः हुगली जिले के कोन्नगर स्थित न्यू पार्क एरिया में रविवार की सुबह तालाब के किनारे अलग ही चहल-पहल देखने को मिली। भोर की पहली किरण के साथ ही मछली पकड़ने का उत्सव शुरू हुआ जिसकी वजह से इलाके में मेले जैसा माहौल बन गया था। लंबी-बंसी, मछली के चारे से भरे पात्र लेकर अपनी-अपनी जगह पर बैठकर मछली शिकारी धैर्यपूर्वक तालाब में मछली पकड़ने के लिए बंसी डालते रहे।
सिर्फ कोन्नगर के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों और दूर-दराज से आए लोग भी तालाब किनारे जमा हुए। बंसी खींचते समय उठने वाला शोर और लोगों की हंसी पूरे इलाके को जीवंत बना रही थी। जब किसी के बंसी में बड़ी मछली फंसती तब वहां खुशियों का माहौल देखने लायक था।
अनुभव और मेलजोल है असली पुरस्कार
मछली शिकारियों का कहना है कि यहां मछली पकड़ना ही मुख्य उद्देश्य नहीं। इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनना, पुराने मित्रों से मिलना और नए लोगों से जुड़ना ही असली खुशी है। शौकिया मछली शिकारी सप्तर्षि साधुखां ने कहा, “मुझे मछली पकड़ना पसंद है। अभी तक कोई मछली नहीं पकड़ी, लेकिन सबके साथ इस माहौल में शामिल होना ही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है।”
तालाब किनारे मौजूद स्थानीय लोगों का भी यही मत था। उन्होंने कहा कि यह आयोजन इलाके की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। हर साल यह उत्सव देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं। मछली पकड़ते हुए लोगों को देखकर ऐसा लगता है जैसे बंगाल की लोक-संस्कृति और पारंपरिक पहचान आज भी जीवित है।

कोन्नगर में मछली पकड़ने के उत्सव के आयोजक न्यू पार्क एसोसिएशन क्लब के अधिकारी।
न्यू पार्क एसोसिएशन क्लब की पहल और पारंपरिक व्यवस्था
न्यू पार्क एसोसिएशन क्लब के तत्वावधान में यह मछली पकड़ने का उत्सव करीब 35 वर्षों से लगातार मनाया जा रहा है। क्लब के जनरल सेक्रेटरी सुब्रत पांडे ने बताया कि आयोजन से पहले तालाब की सफाई की जाती है और मछली शिकारियों को निर्धारित स्थान पर बैठने की व्यवस्था दी जाती है। प्रत्येक मछली शिकारि के लिए लगभग आठ फुट की जगह सुनिश्चित की जाती है ताकि वे आराम से बैठकर मछली पकड़ सकें। इस वर्ष कुल 82 सीटों में से पहले दिन 60 मछली शिकारियों ने भाग लिया।
क्लब के अध्यक्ष रंजन दास ने बताया कि न्यू पार्क के तालाब में रुई, कातला जैसी मछलियों के साथ तीन-चार किलो से लेकर आठ-दस किलो तक की बड़ी मछलियां भी पाई जाती हैं। यही कारण है कि मछली शिकारियों में हर साल इस आयोजन में भाग लेने का उत्साह बना रहता है।
आयोजकों ने बताया कि पूरे दिन उत्सवमय माहौल बना रहा और यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उनका मानना है कि यदि इस तरह के आयोजन योजनाबद्ध और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किए जाएं तो लोक परंपरा सुरक्षित रहती है और प्राकृतिक संतुलन भी कायम रहता है।
कोन्नगर के न्यू पार्क एरिया में आयोजित यह मछली पकड़ने का उत्सव एक बार फिर यह साबित कर गया कि यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाली परंपरा है। तालाब के किनारे बिताया गया दिन शौक, मेलजोल, सामाजिक सौहार्द और सामूहिक आनंद का जीवंत उदाहरण बन गया।